गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान में साथी के लिए भिड़ रहे नर गैंडे, प्रजनन का संतुलन बिगड़ा
गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान में गैंडों की संख्या बढ़ने के बावजूद नर-मादा अनुपात असंतुलित है, जिससे प्रजनन और आनुवंशिक विविधता पर चिंताएं बढ़ रही हैं।

गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान में साथी के लिए भिड़ रहे नर गैंडे।
HighLights
गोरुमारा में नर-मादा गैंडों का अनुपात असंतुलित।
प्रजनन और आनुवंशिक विविधता पर गंभीर चिंता।
विशेषज्ञों ने गैंडों के आदान-प्रदान का सुझाव दिया।
जागरण संवाददाता, जलपाईगुड़ी। बंगाल के गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान में एक सींग वाले गैंडों की संख्या भले ही बढ़ रही हो, लेकिन नर और मादा गैंडों का असंतुलित अनुपात चिंता का विषय बना हुआ है। गैंडों के प्रजनन के लिए एक नर के मुकाबले करीब तीन मादा गैंडों का अनुपात बेहतर माना जाता है। इसके विपरीत 2025 की गैंडा गणना में गोरुमारा में प्रति नर गैंडे पर केवल 1.59 मादा गैंडे पाए गए।
जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान में भी यह अनुपात 1.13 है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मादा गैंडों की तुलना में नर गैंडों की संख्या अधिक होने से उनके बीच मादा साथी पर अधिकार को लेकर संघर्ष की स्थिति बनती है। गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान में कई बार ऐसे संघर्ष सामने आ चुके हैं।
संघर्ष में हारने वाले कुछ नर गैंडों के उस जंगल क्षेत्र को छोड़कर दूसरे क्षेत्रों की ओर जाना पड़ता है। आपसी लड़ाई में गैंडों के घायल होने और मौत की घटनाएं भी हुई है।
गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान में 2022 तक नर और मादा गैंडों का अनुपात करीब 1:1 था। इसके कारण यहां गैंडों की आबादी में अपेक्षित गति से वृद्धि नहीं हो पा रही थी। 2025 की गणना में मादा गैंडों की संख्या में मामूली सुधार हुआ है, लेकिन विशेषज्ञ अभी भी इसे संतुलित स्थिति नहीं मान रहे हैं।
विशेषज्ञों की एक अन्य चिंता गैंडों के सीमित जीन पूल को लेकर है। लंबे समय तक एक ही जीन समूह के गैंडों के बीच प्रजनन होने पर आने वाली पीढ़ियों में आनुवंशिक समस्याएं और विभिन्न बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से वैज्ञानिक तरीके से गैंडों की आबादी के प्रबंधन और अलग-अलग क्षेत्रों के बीच गैंडों के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन फॉर एशियन राइनो के वरिष्ठ सलाहकार और गैंडा विशेषज्ञ डॉ. विभाव तालुकदार ने बंगाल और असम के बीच गैंडों के आदान-प्रदान का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि इससे आनुवंशिक विविधता बढ़ाने में मदद मिल सकती है और भविष्य में संभावित समस्याओं को कम किया जा सकता है।
जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान के प्रभागीय वनाधिकारी प्रवीण काशवान ने कहा कि राष्ट्रीय उद्यान में गैंडों की संख्या बढ़ी है। हालांकि, आनुवंशिक समस्या से जुड़े विषय की समीक्षा किया जाना जरूरी है। वहीं, गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान के प्रभागीय वनाधिकारी द्विज प्रतिम सेन ने बताया कि यहां गैंडों की संख्या में छह की वृद्धि हुई है। मादा और नर गैंडों के अनुपात में भी थोड़ा सुधार आया है।
गोरुमारा में छह और जलदापाड़ा में 39 गैंडे बढ़े
2025 की गैंडा गणना के अनुसार गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान में गैंडों की संख्या छह बढ़कर 61 हो गई है। वर्ष 2022 में यहां 55 गैंडे थे। इससे पहले 2013 में 43, 2015 में 49 और 2019 में 52 गैंडे दर्ज किए गए थे।
जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान में गैंडों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2025 की गणना में यहां 39 गैंडे बढ़े और कुल संख्या 331 हो गई। वर्ष 2022 में जलदापाड़ा में 292 गैंडे थे। 2013 में इनकी संख्या 186, 2015 में 204 और 2019 में 237 थी। संख्या में लगातार वृद्धि से जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन में खुशी है।
सीमित क्षेत्र और गैंडों की बढ़ती आबादी
गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान करीब 89 वर्ग किलोमीटर और जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान करीब 216 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। इन दोनों क्षेत्रों में 2025 की गणना के अनुसार क्रमश: 61 और 331 एक सींग वाले गैंडे मौजूद हैं। ऐसे में बढ़ती आबादी के साथ उनके बीच क्षेत्र, भोजन और मादा साथी को लेकर प्रतिस्पर्धा भी प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन रही है।
