कैचवर्ड : अस्तित्व संकट

-रेती जंगल के मार्ग से हाथी ने किया चाय बागान में प्रवेश

-लॉकडाउन में हाथी का हमला रूटीन घटना बन गयी है : टिंपू उरांव

संवाद सूत्र,वीरपाड़ा: एक तरफ कोरोना तो दूसरी तरफ हाथियों का आतंक। चाय बागान श्रमिकों के लिए एक तरफ खाई तो दूसरी ओर कुआं जैसी कहावत चरितार्थ हो रही है। ऊपर से बागान भी बंद। आय का कोई साधन नहीं। उल्लेखनीय है कि मंगलवार देर रात को करीब साढ़े 12 बजे बंद पड़े बांदापानी चाय बागान में एक दंतैल हाथी ने तांडव मचाया और इलाके के चाय श्रमिकों के घर को नेस्तानाबूद कर दिया। श्रमिकों का कहना है कि हाथी रेती जंगल से होकर आया था। हाथी ने बागान के किशोर उरांव, आन्ना उरांव, बिबरारी धोनया के घर में रखे राशन को चट कर लिया। साथ ही उनके घर को अपने सूंढ़ से तोड़ दिया।

बांदापानी चाय बागान के टिंपू उरांव ने बताया कि हाथी का हमला हमारे लिए अब रूटीन दिनचर्या बन गयी है। लॉक डाउन के बाद से यह और अधिक बढ़ गयी है। हमारे जान-माल का नुकसान तो होता ही है, हम एक रात भी चैन से नहीं गुजार सकते। रात को यमराज का भय सताता रहता है।

इस संबंध में वन विभाग के दलगांव रेंजर के अधिकारी दोर्जे शेरपा ने बताया कि यदि श्रमिक इस घटना की रिपोर्ट हमसे करते है, तो हम इसका क्षतिपूर्ति देने का प्रयास करेंगे।

कैप्शन : क्षतिग्रस्त श्रमिक का घर

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस