कोलकाता, जागरण संवादाता। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लोकसभा चुनाव के बाद एक बार फिर सोमवार से जिला दौरा शुरू किया हैं। इस कड़ी में आज ममता बनर्जी सबसे पहले हावड़ा पहुंची। यहां दोपहर एक बजे शरत सदन में जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पूर्व मेदिनीपुर जिले के अपने प्रशासनिक दौरे के तहत दीघा पहुंची। मंगलवार (20 अगस्त) को ममता बनर्जी दीघा में विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर का उद्घाटन करेंगी, जिसका निर्माण कोलकाता महानगर विकास प्राधिकरण (केएमडीए) द्वारा किया गया है। 

वहीं, बुधवार को ममता बनर्जी कन्वेंशन सेंटर में बैठक करेंगी जहां जिले में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की जाएगी। बैठक में जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री उपस्थित रहेंगे। इस दौरान सीएम कुछ परियोजनाओंं का शुभारंभ और शिलान्यास भी करेंगी। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार ममता बनर्जी का इसी दिन कोलकाता लौटने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। यहां बता देंं कि लोकसभा चुनाव से पहले भी विभिन्न जिलों का दौरा ममता बनर्जी की कार्यसूची में शामिल रहा है।

बस्ती की बदहाली पर भड़कीं ममता 

हावड़ा में प्रशासनिक बैठक के पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हावड़ा के फोरसर रोड स्थित बस्ती इलाके में औचक दौरे पर पहुंच गईं। सीएम के अचानक इस दौरे से अधिकारी सकते में थे। सीएम बस्ती इलाके में अव्यवस्था व बदहाली को देख नाराज हुईं। उन्होंने बस्ती के लोगों से बात की और उनकी समस्याओं के बारे में जाना।

इलाके में शौचालय की कमी पर वह बेहद नाराज़ हुईं। साथ ही यहां के लोगों का राशन कार्ड नहीं बनाए जाने पर भी अधिकारियों को उन्होंने लताड़ लगाई। इलाके में विकास का काम नहीं होने को लेकर मंत्री व जिलाध्यक्ष अरूप राय से उन्होंने जवाब मांगा।

बैठक के दौरान उन्होंने विशेषकर हावड़ा के बस्ती इलाकों के विकास पर प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर एमएलए तक को विशेष ध्यान देने की बात कही। बैठक के दौरान उन्होंने हावड़ा में जलजमाव की समस्या को प्रमुखता से उठाया और उसके निदान को कदम उठाने को कहा।

ममता ने कहा, पैसा खर्च करने के बावजूद विकास कार्य में तेजी क्यों नहीं आ रही है? विकास कार्यों  व विकास के अधूरे पड़े कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया जायेगा, जिसका नेतृत्व डीएम मुक्ता आर्य करेंगी। इस मौके पर  ग्रामीण हावड़ा के प्रशासनिक अधिकारियों से विशेषकर उलबेडिया और अामता में बाढ़ की संभावित स्थिति से निपटने को उन्होंने सतर्क रहने को कहा। 

गौरतलब है कि इस बार लोकसभा चुनाव में नतीजे तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में नहीं रहे हैं और पार्टी राज्य की कुल 42 में से 22 सीटों पर सिमट कर रह गई है। जबकि भाजपा ने जबरदस्त सेंधमारी करते हुए 18 सीटों पर जीत हासिल की है। अब चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर तृणमूल कांग्रेस को विधानसभा चुनाव 2021 से पहले चंगा करने में जुट गए हैं। पार्टी में संगाठनिक स्तर पर कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। तृणमूल ने  बीते महीने ही जनसंपर्क बढ़ाने के लिए 'दीदी के बोलो' अभियान की शुरुआत  की है। 

इससे पहले 2016 में पश्चिम बंगाल में 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को 211 सीटों पर जीत मिली थी जबकि भाजपा को सिर्फ तीन सीट हासिल हुई थी। इसके बाद से भाजपा मजबूत होते हुए मुख्य प्रतिद्वन्द्वी बन गई है।  

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Posted By: Preeti jha

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