-फोन पर मिलने वाली धमकियों की कोई परवाह नहीं की बाप ने

-अदम्य संघर्ष का ही परिणाम रहा कि आरोपित पकड़ा गया

रीता दास, सिलीगुड़ी : चाय बगान में पत्ती तोड़कर किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। पैसे कम थे, लेकिन खुशियां अपार। भगवान ने इतनी प्यारी बेटी देकर मुझे तीनों लोकों का सुख जैसे मेरी झोली में डाल दिया था। उसकी खिलखिलाती हंसी से मेरी सारी थकान दूर हो जाती थी। लेकिन इस खुशी पर एक गंदे आदमी की नजर पर गई। एक साल पहले मेरे पड़ोसी राजेश क्षेत्री (35) ने मेरी फूल से बच्ची को अपनी हवस का शिकार बना डाला। इस घटना ने मेरे तन-बदन में आग लगा दी। अपनी बिटिया को न्याय दिलाने के लिए मैं थाने जाने का तैयार हो गया। अपने पाठक को बता दूं कि यह कोई मनगढंत कहानी नहीं, एक हकीकत है, आपके शहर सिलीगुड़ी की। शहर से कुछ दूर बागडोगरा की। बागडोरा थाना क्षेत्र के एक चाय बगान के श्रमिक पिता व उनके परिवार की। एक साल पहले कुछ ऐसा हुआ, जिसके कारण वह आज तक चैन की नींद नहीं सो पाया है। उसका संघर्ष अभी भी जारी है। श्रमिक पिता अपनी लाडली को न्याय दिलाने के लिए थाना, कोर्ट-कचहरी सब जगह जाने के लिए तैयार हो गया। लेकिन गांव वालों व आरोपी के परिजनों ने दया कर देने की बात कहकर माफ करने को कहा। आरोपी ने भी हाथ जोड़ते हुए कहा कि वह अब ऐसी गलती नहीं करेगा। लेकिन उसके आंसू मगरमच्छ के आंसू थे। उस राक्षस का असली चेहरा बहुत जल्द सामने आ गया। कुछ दिन के बाद भीषण गर्मी के कारण पूरा परिवार घर के बरामदे में सोया हुआ था। रात को वह वहशी द¨रदा फिर दबे पांव घर में घुस आया और मासूम बच्ची को पास के खेत में ले जाकर दुराचार किया। वह रात पिता के लिए कयामत की रात थी। लेकिन उसने अपनी बच्ची के आंसू पोछते हुए बिटिया के आंसू का हिसाब लेने की कसम खाई। यहीं से पिता का संघर्ष शुरू हुआ। सुबह होते ही श्रमिक पिता ने बागडोगरा थाने में घटना की प्राथमिकी दर्ज करा दी।

इस बार वह पिता पत्थर सा कठोर हो गया था। उसके भीतर आग धधक रही थी। कोई कुछ भी कहता, वह नहीं सुनता। रहम, दया, क्षमा जैसे शब्दों से उसे घृणा हो गई। बेटी के साथ हुए इस अपराध के खिलाफ पिता ने कदम बढ़ाया। काम-धाम तो जैसे छूट ही गया था। काम के दौरान जब भी उस घटना की चर्चा होती उसका हृदय तार-तार हो जाता। लेकिन पिता ने हार नहीं मानी। चाय बगान में काम करने में उसका मन नहीं लग रहा था। वह हमेशा थाने जाकर बड़े बाबू से आरोपी को गिरफ्तार करने की विनती करता था। बाद में पता चला कि आरोपित राजेश क्षेत्री नेपाल भाग गया।

कुछ दिनों बाद पिता को धमकी भरे फोन आने लगे। उसे केस उठाने की धमकी दी जाने लगी। जान से मारने सहित बहुत कुछ सुनना पड़ रहा था। इतना ही नहीं आरोपित को राजनीतिक सहारा तक मिल गया। चारों ओर का दबाव वह पिता झेल रहा था। लेकिन कभी उसने पैर पीछे नहीं हटाए। पिता कहता है-'मेरी जंग में यदि कुछ लोग हैवान के साथ थे, तो समाज में कुछ लोग मेरे साथ भी थे। एक स्त्री तो मेरे लिए शक्ति का अवतार थी। मैंने कंचनजंघा उद्धार केंद्र संस्थापक रंगू सौरया से संपर्क किया। उन्होंने अपराधी को पकड़वाने में बहुत मदद की। पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया। अभी भी ट्रायल चल रहा है। मुझे जीत की पूरी उम्मीद है। अब मेरे लिए संघर्ष ही जीवन है। मेरी बेटी अब मुस्कुरा रही है। धीरे-धीरे खुशियां फिर झरोके से छन कर घर में आने लगी है।

By Jagran