-पहाड़ से मनमोहक नजर आता असले झरना

-गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन का पर्यटन विभाग व राज्य सरकार संयुक्त प्रयास करे तो पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है असले झरना

-बेरोजगार युवाओं को मिल सकता रोजगार

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संसू,.मिरिक ( दीप मिलन प्रधान ): महकमा क्षेत्र अन्तर्गत भारत -नेपाल सीमावर्ती गांव से महज साढ़े चार किलोमीटर दूर स्थित असले झरना ( असलिया वाटर फाल) पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बिन्दु बन गया है। मिरिक महकमा अन्तर्गत सुदूरवर्ती खर्बनी गांव से कुछ दूर स्थित पहाड़ की चट्टानों से बहने वाला झरना का प्राकृतिक दृश्य अदुभत नजर आते, उक्त झरना दाíजलिंग पहाड़ पर सबसे ऊंचा माना जाता है। झरना से बहने वाला पानी अंत में मेची नदी में मिल जाता है। जब खर्बनी गांव से हरियाली चाय बागान और जंगलो से गुजरते हुए भारत -नेपाल सीमा से बहने वाली मेची नदी के किनारे पहुंच जाते हैं तब वहां से ऊपर पहाड़ में असले झरना का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। यहां हर दिन पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को पैदल जाना पड़ता है या फिर रिजर्व वाहन से आना पड़ता है। कच्ची सड़क होने के कारण बाइक अथवा दोपहिया वाहन से पहुंचना दुर्लभ है। कुछ माह से सुíखयों में आए इस झरने को देखनेके लिए बिहार, सिलीगुडी , डुवार्स , मालदा , काठमांडू और आसपास से पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। जो स्थानीय युवाओं की मदद से झरना तक पहुंचते हैं। शहरी दुनिया से अलग सा रहा झरना परिसर का शान्त और प्राकृतिक परिवेश बड़ा ही सुकुन देती है। असले झरनाको नजदीक से दीदार करने के लिए मिरिक घूमने आए पर्यटक बार बार आने को बेताब रहते हैं, लेकिन, झरना तक पहुंचने के लिए यहां पर पूर्वाधारों का विकास होना नितान्त जरुरी है। सबसे पहले साढ़े चार किलोमीटर की दूरी वाली सड़क को दुरुस्त एवं मजबूत करना जरुरी है ताकि पर्यटक सहज से झरना तक पहुंच सकें । यही नहीं यहां पर होम स्टे, चाय स्टाल , पिकनिक स्पाट और यहां पर टहलने के लिए फूल के बगीचा ,पाíकंग और सबसे महत्वपूर्ण झरना के निकट तक पहुंचने के लिए पक्के ओपन हवा घर का निर्माण होना जरुरी है। यहां के स्थानीय सचेत युवक समीर लिम्बू , ललित राई , सिरकमल राई और प्रकाश राई ने बताया कि , असले झरनाको पर्यटन स्थल के रुप मे विकसित करने के लिए पर्याप्त संभावना है। झरना का नजारा लेने के लिए आने वाले कतिपय पर्यटकों के आगमन से स्थानीय लोग भी लाभान्वित हो रहे हैं। खर्बनी गांव में एक दो दुकानें भी खुल गई है जहां स्थानीय खाद्यान्न और पेय पदार्थ का सेवन कर लोग असले झरना कीतरफ बढ सकते हैं। पर्यटन सरोकारी समीर लिम्बू और शिक्षक सोवित विश्व ने शीघ्र ही पर्यटकों की सुविधा के लिए कमेटी गठित करने की जानकारी दी है। उन्होने कहा कि , यदि यहां पर पश्चिम बं्गाल सरकार , पर्यटन सरोकारी , गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन के पर्यटन विभाग की ओर से पूर्वाधार विकास के लिए ठोस पहल की जाती है तो निश्चित रुप में असले झरना की ख्याति विश्व में फैल सकती है और सीमावर्ती ग्रामीण पर्यटन विकास के साथ-साथ स्थानीय बेरोजगार लोगों को अपनी ही जगह में पर्याप्त रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

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(फोटो: मिरिक के सीमवर्ती खर्बानी गांव से साढ़े चार किमी दूर स्थित असले झरना का मनमोहक दृश्य )

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Edited By: Jagran