वर्ष 1986 में अलग गोरखालैंड राज्य के लिए हुए आंदोलन में 1200 से अधिक लोग हुए थे शहीद

पहाड़, तराई व डुवार्स क्षेत्र में हिल्स तृणमूल कांग्रेस,गोरामुमो,भाजपा श्रद्धापूर्वक मना शहीद दिवस

संसू.मिरिक: वर्ष 1986 में अलग गोरखालैंड राज्य के लिए हिंसात्मक आंदोलन में 1200 से अधिक लोग शहीद हो गए थे। इनकी याद में मंगलवार को पार्वत्य क्षेत्र व तराई-डुवार्स में श्रद्धा के साथ शहीद दिवस मनाया गया। इसी क्रम में मंगलवार को स्थानीय कृष्णनगर स्थित शहीद वेदी पर गोजमुमो बिमल गुट , गोजमुमो अनित खेमा , हिल्स तृणमूल कांग्रेस , गोरामुमो की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की गई। जब कि भाजपा मिरिक मण्डल कमेटी ने भी अपने कार्यालय में शहीद दिवस मनाया इस दौरान भाजपा के दाíजलिंग जिला समिति महासचिव किशोर सिह ने कहा कि, शहीद की ना जाति ना ही धर्म होता है। अपने भूमि और जातीय अस्तित्व के लिए बलिदान होने वालों का हर हाल में मूल्याकन होना चाहिए। शहीदों ने अपने स्वराज के लिए प्राण तक त्याग दिए। गोरखाओं ने अपने भूमि के लिए ही नहीं बल्कि देश के सुरक्षा में भी अमूल्य योगदान दिया है। ऐसे मे केन्द्र और राज्य सरकार को गोरखाओं के साथ न्याय करना नैतिक दायित्व है। जब तक अलग राज्य तथा स्थायी राजनैतिक समाधान नहीं होगा तब तक शहीदों को न्याय नहीं मिलेगा।

-----(दो फोटो) -

(फोटो :मिरिक व सौरेनी बाजार में शहीद वेदी पर श्रद्धांजलि अर्पित करते विभिन्न दलों के सदस्य)

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वर्ष 1986 में अलग गोरखालैंड राज्य के लिए हुए आंदोलन में 1200 से अधिक लोग हुए थे शहीद

पहाड़, तराई व डुवार्स क्षेत्र में हिल्स तृणमूल कांग्रेस,गोरामुमो,भाजपा श्रद्धापूर्वक मना शहीद दिवस

संसू.मिरिक: वर्ष 1986 में अलग गोरखालैंड राज्य के लिए हिंसात्मक आंदोलन में 1200 से अधिक लोग शहीद हो गए थे। इनकी याद में मंगलवार को पार्वत्य क्षेत्र व तराई-डुवार्स में श्रद्धा के साथ शहीद दिवस मनाया गया। इसी क्रम में मंगलवार को स्थानीय कृष्णनगर स्थित शहीद वेदी पर गोजमुमो बिमल गुट , गोजमुमो अनित खेमा , हिल्स तृणमूल कांग्रेस , गोरामुमो की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की गई। जब कि भाजपा मिरिक मण्डल कमेटी ने भी अपने कार्यालय में शहीद दिवस मनाया इस दौरान भाजपा के दाíजलिंग जिला समिति महासचिव किशोर सिह ने कहा कि, शहीद की ना जाति ना ही धर्म होता है। अपने भूमि और जातीय अस्तित्व के लिए बलिदान होने वालों का हर हाल में मूल्याकन होना चाहिए। शहीदों ने अपने स्वराज के लिए प्राण तक त्याग दिए। गोरखाओं ने अपने भूमि के लिए ही नहीं बल्कि देश के सुरक्षा में भी अमूल्य योगदान दिया है। ऐसे मे केन्द्र और राज्य सरकार को गोरखाओं के साथ न्याय करना नैतिक दायित्व है। जब तक अलग राज्य तथा स्थायी राजनैतिक समाधान नहीं होगा तब तक शहीदों को न्याय नहीं मिलेगा।

Edited By: Jagran