सिलीगुड़ी, जागरण संवाददाता। शहर के सभी मार्गो पर देर रात तक नियमों को धत्ता बताते हुए सुविधा के नाम पर सीनाजोरी कर ई-रिक्शा चालक फर्राटा भर रहे हैं। ज्यादातर चालकों ने न तो ई रिक्शे का रजिस्ट्रेशन कराया है और न हीं उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस ही है। सरकार को बिना किसी प्रकार के रोड टैक्स चुकता किए पूरे शहर में चक्कर लगा रहे हैं।

ई-रिक्शा का शहर में संचालन लगभग दो साल पहले शुरू हुआ था। लेकिन इस साल ई-रिक्शा में इस कदर बाढ़ आ गई कि अब लोगों के लिए सुविधा की जगह समस्या बन गए हैं। विधान मार्केट, सेवक रोड, हिलकार्ट रोड, कोर्ट मोड़, एनजेपी आदि क्षेत्रों में कतार में रेला लगाकर चलने वाले ई-रिक्शा लोगों की राह रोक दे रहे हैं। शहर में चारों तरफ जाम की वजह भी बने हैं।

इनका कोई रूट निर्धारित नहीं है, पूरे शहर में फर्राटा भर रहे हैं। जो ई-रिक्शा चालक ने अपना पंजीकरण एसडीओ एआरटीओ दफ्तर में कराया है। अधिकाश रिक्शा चालकों को टेन नंबर उपलब्ध कराया गया है। अभी भी बहुत सारे टोटो ई रिक्शा के पास टेन नंबर भी नहीं है। नाबालिग भी यह रिक्शा चला रहे हैं।

तय नहीं रहता कि कब किस तरफ रिक्शा मोड़ देंगे। आए दिन हादसे भी हो रहे हैं। खास बात यह है कि एआरटीओ, जिला और पुलिस प्रशासन को यह मालूम है कि प्रारंभ में तो कई यूनियन और जिला प्रशासन की ओर से इसपर अंकुश लगाने की कार्रवाई हुई। ज्यों ज्यों समय बीत रहा है त्यों त्यों यह कार्रवाई ठंडा पड़ने लगा है। यहीं कारण है कि अब ऑटो चालक भी सड़क पर मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे है।

ऑटो चालक जिसके आगे बैठने की सख्त मनायी है दो के बदले तीन चार यात्रियों को बैठा रहे है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब टोटो पर रोक नहीं तो कानून क्या सिर्फ ऑटो चालक के लिए है। टोटो को प्रतिबंधित क्षेत्र से परिचालन पर प्रशासन रोक लगाए। उसके बाद ही ऑटो के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए। लापरवाही जिस भी विभाग की ओर से बरती जा रही हो, पर भुगतना तो आम आदमी को पड़ रहा है।

हद तो यह है कि स्वयं मेयर भी जाम की समस्या से लोगों को जूझने की बात करते है। उनका कहना है कि इस संबंध में पुलिस आयुक्त को पत्र भी लिखा है। यातायात डीसीपी नागेंद्र नाथ त्रिपाठी का कहना है कि इस संबंध में समय समय पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए जरूरी है आम लोगों को जागरूक होना। 

Posted By: Preeti jha