सिलीगुड़ी [राजेश पटेल]। सुंदरता और सुंदरता के पारखी। मतलब दार्जीलिंग और बॉलीवुड। इन दोनों के बीच ऐसा प्यार है, जो कभी न खत्म होने वाला है। फिल्मकारों को आकर्षित करने वाले हिल स्टेशन में यदि किसी का नाम सबसे पहले लिया जाता है तो वह दार्जीलिंग ही है। यह कहें कि दार्जीलिंग पर बॉलीवुड फिदा है तो कोई गलत नहीं होगा। यहां अब तक दो दर्जन से ज्यादा फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। खास बात यह रही कि इन फिल्मों में ज्यादातर सुपर-डुपर हिट रहीं। सिर्फ बॉलीवुड नहीं, आंचलिक भाषाओं में भी बननेवाली फिल्मों की शूटिंग यहां खूब होती है। अभी सुपर स्टार रजनीकांत की फिल्म काला की शूटिंग दार्जीलिंग में ही बीते जून-जुलाई में पूरी हुई है। आइए जानते हैं यहां किन-किन फिल्मों की शूटिंग हुई है और कौन-कौन स्टार आए हैं। 


दार्जीलिंग के पास कर्सियांग के एक चाय बागान में फिल्म शूटिंग का दृश्य।
जब प्यार किसी से होता है (1961)
इस फिल्म के माध्यम से राजेश खन्ना ने हिमालयी ढलानों की घुमावदार सड़कों पर शर्मिला टैगोर को लुभाया था। देव आनंद और आशा पारेख ने नासिर हुसैन की इस फिल्म में हिल्स की रानी दार्जीलिंग के सुंदर इलाकों में शूटिंग की थी। इस फिल्म में मोहम्मद रफी द्वारा गाए गए जिया हो जिया कुछ बोल दो... को कौन भूल सकता है। 
हरियाली और रास्ता (1962)
विजय भट्ट द्वारा निर्देशित यह फिल्म दार्जीलिंग में पूरी तरह से शूट की गई थी।
प्रोफेसर (1962)
पूरी फिल्म दार्जीलिंग के आसपास शूट की गई थी। चौरास्ता और बटासिया लूप में इसकी अधिकतर शूटिंग हुई थी।
चाइना टाउन (1962)
शम्मी कपूर अभिनीत चाइना टाउन के अधिकांश भाग को दार्जिलिंग और उसके आस-पास शूट किया गया था। इसमें शकीला, हेलेन और मदन पुरी थे। फिल्म शक्ति सामंत द्वारा निर्देशित की गई थी। यह हिट बन गई।
आये दिन बहार के (1966)
आशा पारेख और धर्मेंद्र अभिनीत 1966 में बनी आए दिन बहार सुपरहिट फिल्म की शूटिंग दार्जिलिंग के चाय बागानों में हुई थी। 
फिल्म जग्गा जासूस की दार्जीलिंग में शूटिंग का एक दृश्य, कैटरीना कैफ और रणवीर।
हमराज़ (1967)
मुमताज और सुनील दत्त ने इस संगीत थ्रिलर में अभिनय किया था। इसमें राज कुमार, मदन पुरी और बलराज साहनी भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में थे। फिल्म शायद महेंद्र कपूर द्वारा प्रस्तुत सुपरहिट नीले गगन के तले गीत के लिए सबसे अच्छी तरह से जाना जाता है। इसकी भी अधिकतर शूटिंग दार्जीलिंग में ही हुई थी।
बहारों की मंजिल (1968)
एक साल बाद धर्मेंद्र दार्जीलिंग वापस आए। इस बार बहारों की मंजिल के लिए मीना कुमारी के साथ।
झुक गया असमान (1968)
राजेंद्र कुमार और सायरा बानो की इस फिल्म के लिए भी निर्माता को दार्जिलिंग ही रास आया।
 इन फिल्मों की भी शूटिंग हुई है दार्जीलिंग व आसपास में
इनके अलावा अाराधना (1969), महल (1969), जोशीला (1973), सगीना (1974), अनजाने (1976), अनुरोध (1979), लहू  के दो रंग (1979), बरसात की एक रात (1981), राजू बन गया जेंटलमैन (1992), चोर और चांद (1993), बड़ा दिन (1998), मैं हूं ना (2004), परिणीता (2005), वाया दार्जीलिंग (2008), यारियां (2014), बर्फी (2012), जग्गा जासूस आदि की भी अधिकतर शूटिंग पहाड़ों की रानी दार्जिलिंग में ही हुई है। 

 

Posted By: Rajesh Patel

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