सिलीगुड़ी, जागरण संवाददाता। नशा कारोबार और नशेडि़यों में छात्राओं की संख्‍या तेजी से बढ़ रही है। इससे सिलीगुड़ी मेट्रोपॉलिटन और दार्जिलिंग जिला पुलिस के अभियान ‘से नो टू ड्रग्‍स’ को धक्‍का लग रहा है। युवतियों और महिलाओं की आड़ में जहां नशे के धंधेबाज अपना कारोबार आसानी से फैलाते हैं, वहीं पुलिस से लेकर अन्य जांच व सुरक्षा एजेंसियों की परेशानी बढ़ गई है।  ‘से नो टू ड्रग्‍स’ अभियान के साथ सिलीगुड़ी मेट्रोपॉलिटन और दार्जिलिंग जिला पुलिस ने नशा मुक्त शहर गठन की दिशा कदम बढ़ाया है। मगर उनकी तमाम कोशिशों के बाद भी स्कूल-कालेज व विश्वविद्यालय की छात्राओं से लेकर गृहिणीयों तक मादक पदार्थ सेवन के साथ कारोबार में अपनी किस्‍मत आजमा आ रही हैं।

नशा और ईजी मनी के लिए जंजाल में फंस रहीं

टी, टिंबर और टूरिज़्म के लिए विश्व पटल पर विख्यात पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार माना जाने वाला शहर सिलीगुड़ी अब मादक कारोबार को लेकर सुर्खियों मे रहता है। सिलीगुड़ी मेट्रोपॉलिटन और दार्जिलिंग जिला पुलिस ने नशा मुक्त समाज गठन के उद्देश्य ‘से नो टू ड्रृग्‍स’ नामक मुहिम छेड़ रखा है। नशा कारोबारियों को जड़ से उखाड़ फेंखने के लिए सिलीगुड़ी मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने स्पेशल आपरेशन ग्रुप का गठन किया है। इसके बावजूद शहर मे नशे का जाल फैलता जा रहा है। अवैध कफ सिरप, याबा टैबलेट, गांजा, डोडा, अफीम, ब्राउन शुगर, हेरोइन और कोकेन जैसे मादक पदार्थ का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। पुरुषों के साथ अब महिलाए भी कारोबार मे कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। कोई अपनी नशे की लत को शांत करने तो कोई 'ईजी मनी' यानी आसानी से खूब रुपये पाने की लालच में कारोबार का हिस्सा बन रही हैं।

लड़कियां भी हुक्‍के का दम मारती

पुलिस सूत्रों की मानें तो हाई स्कूल से ही लड़के खैनी, गुटखा, और सिगरेट की लत पकड़ रहे हैं। कालेज मे आते-आते सिगरेट से गांजा और फिर ड्रग्स को चखते देर नहीं लगती। और जब एक बार ड्रग्स खून में मिलकर सिर पर चढ़ता है तो उसकी लत छुड़ाना जी का जंजाल बन जाता है। कालेज और विश्वविद्यालय की गुमराह छात्राएं भी ड्रग्स के आगोश मे जाने लगी हैं। पिछले एक दशक मे सिलीगुड़ी काफी तेजी के साथ विकास किया है। शहर की युवा पीढ़ी ने बार और पब कल्चर को अपनाया है। रईशी की पट्टी बांधे अभिभावकों ने भी नशे मे धुत्त होकर बच्चों के घर लौटने वाली आदत को नजरंदाज कर बढ़ावा दिया है। खैर अब तो बार और पब मे बॉयफ्रेंड के साथ गर्लफ्रेंड भी खुलेआम हुक्के का दम मारती नजर आती हैं। अब तो गृहणियां भी नशे की चपेट मे आ रही हैं।

नशे में धुत सड़क किनारे मिली महिला

बीते मई के आखिर मे शहर के कचहरी रोड किनारे मदहोश पड़ी एक महिला को बरामद कर पुलिस ने सिलीगुड़ी जिला अस्पताल मे भर्ती कराया। अपने नशे की लत को छुपाने के लिए उस महिला अपनी इज्जत को भी दांव पर लगाया लेकिन पुलिस ने सच्चाई को उजागर किया। कुछ महीने पहले माटीगाड़ा इलाके मे नशे मे धुत्त दो महिलाओं की हत्या का मामला सामने आया था। उनमे से एक गृहिणी बताई गई थी। ये घटनाएं युवती और महिलाओं के नशे के आगोश में समाने को प्रमाणित कर रही हैं।

कहते हैं मनोवैज्ञानिक

शहर के मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि महिलाए हर स्तर पर पुरुषों से कम नहीं हैं। सिलीगुड़ी शहर की युवतियां और गृहिणीयां भी निजी स्कूल से लेकर कारपोरेट सेक्टर मे नौकरी कर रही हैं। काम के दबाव को काम करने के लिए नशे की ओर बढ़ना आम है। वहीं घर का कलह, मियां-बीबी के बीच तकरार, अकेलापन आदि महिलाओं को नशे के आगोश में ले जाने वाला कारण हो सकता है।

लेकिन युवतियों व महिलाओं के नशे के दल-दल में उतरने से कारोबारियों का काम और भी आसान हो चला है। नशा कारोबारी तरह-तरह से प्रलोभन, मजबूरी का फायदा या ब्‍लैकमेल कर युवतियों को इस कारोबार में इस्‍तेमाल कर रह हैं। कई बार गरीबी का फायदा उठाकर या फिर नशे के  लत की पोल खोलने की धमकी देकर ये गिरोह युवतियों और गृहणियों के हाथों डिलिवरी कारवा रहे हैं। बदले में उन्हें नशे की खुराक मुफ्त में मुहैया करा रहे हैं। वहीं कम समय मे मोटी रकम उपार्जन की लालच में भी कालेज की छात्राएं और महिलाएं इस कारोबार की ओर आकर्षित हो रही हैं। अब छात्राओं के बैग, कारपोरेट लिबास मे चल रही लड़की के हाथ की फाइल या फिर गृहणियों के पल्लू मे बंधी नशे की पुडि़या को पकड़ना पुलिस व जांच एजेंसियों के लिए लोहे के चने चबाने जैसा ही है।

मादक कारोबारियों के तार अंतर्राष्ट्रीय गिरोह के साथ जुड़े होने की पुष्टि हो चुकी है। सिलीगुड़ी से मादक पदार्थ मालदा, मुर्शिदाबाद, लाल गोला आदि इलाको से पहुंचाया जा रहा है। ऐसे में मादक कारोबार से महिलाओ के जुड़ने से सुरक्षा जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ चली है।

Edited By: Sumita Jaiswal