संवाद सूत्र, रंगपो: विश्व हिंदू परिषद पूर्वी जिला समिति द्वारा काची कामकोटि मंदिर जालिपुल (पूर्व सिक्किम) में तीन दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण का आयोजन किया। अनुष्ठान का मुख्य आकर्षण परम शक्तिपीठ वात्सल्य ग्राम वृंदावन से आई पूज्य साध्वी ऋतंभराजी की वरिष्ठ शिष्या विदुषी सुहृदय गिरिजी का धारा-कथा-प्रवचन था। कार्यक्रम का आकर्षण उनके साथ आए छह भजनकारों द्वारा प्रस्तुत मधुर भजन थे। ऐसा ही एक कार्यक्रम 15 मई को पूर्व सिक्किम सामदोंग में भी आयोजित किया गया था। विश्व हिंदू परिषद देश के विभिन्न हिस्सों में इस तरह के समारोहों का आयोजन कर लोगों के बीच अपने धर्म और संस्कृति के प्रति प्रेम और सद्भाव और देश और मिट्टी के प्रति समर्पण के उद्देश्य से करती है। कार्यक्रम का आयोजन सिक्किम की पूर्व जिला समिति द्वारा विशेष कार्यक्रम के रूप में किया गया था। आयोजक समिति अनुसार भागवत प्रेम और देश और मातो प्रेम ने एक समृद्ध धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया है, कामकोटि मंदिर परिसर और आसपास के गावों की गरिमा को बढ़ाया है।

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विश्व हिंदू परिषद पूर्वी जिला समिति द्वारा काची कामकोटि मंदिर जालिपुल (पूर्व सिक्किम) में तीन दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण का आयोजन किया। अनुष्ठान का मुख्य आकर्षण परम शक्तिपीठ वात्सल्य ग्राम वृंदावन से आई पूज्य साध्वी ऋतंभराजी की वरिष्ठ शिष्या विदुषी सुहृदय गिरिजी का धारा-कथा-प्रवचन था। कार्यक्रम का आकर्षण उनके साथ आए छह भजनकारों द्वारा प्रस्तुत मधुर भजन थे। ऐसा ही एक कार्यक्रम 15 मई को पूर्व सिक्किम सामदोंग में भी आयोजित किया गया था। विश्व हिंदू परिषद देश के विभिन्न हिस्सों में इस तरह के समारोहों का आयोजन कर लोगों के बीच अपने धर्म और संस्कृति के प्रति प्रेम और सद्भाव और देश और मिट्टी के प्रति समर्पण के उद्देश्य से करती है। कार्यक्रम का आयोजन सिक्किम की पूर्व जिला समिति द्वारा विशेष कार्यक्रम के रूप में किया गया था। आयोजक समिति अनुसार भागवत प्रेम और देश और मातो प्रेम ने एक समृद्ध धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया है, कामकोटि मंदिर परिसर और आसपास के गावों की गरिमा को बढ़ाया है।

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Edited By: Jagran