-नेशनल पब्लिक स्कूल में संस्कारशाला का आयोजन

-पशु-पक्षियों से भी सबको करना होगा प्यार

-अभी नहीं संभले तो भविष्य में होगी भारी परेशानी

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : वर्तमान में पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिग, प्रदूषण व पेयजल की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में पर्यावरण की सुरक्षा बेहद जरूरी है। जबकि हम अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्यावरण का लगातार नुकसान कर रहे हैं। लगातार बढ़ रही जनसंख्या की वजह से जंगलों की कटाई का सिलसिला रूकने का नाम नहीं ले रहा है। वनों की कटाई से जहां एक तरफ वायुमंडल को नुकसान हो रहा है,वहीं दूसरी तरफ पशु पक्षियों का आवास उजड़ने से कई प्रजातियां लुप्त हो चुकी है, तो कई लुप्त होने के कगार पर है। इसके अतिरिक्त जानवरों के प्रति मानव संवेदना भी लुप्त होने को है। राजा-महाराजाओं की तरह हाथी-घोड़ा व सिंह-बाघ तो नहीं लेकिन वर्तमान समय में अपना स्टैंडर्ड बनाए रखने के लिए बेशकीमती कुत्ते व बिल्लियां पालते हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर जानवरों को गाड़ी से कुचलना, घायल जानवरों को नजरअंदाज कर आगे निकल जाना मानवता को शर्मसार करता है। जीवों के प्रति प्रेम व दया-भाव ही मानव धर्म है। प्राचीन काल में देवी-देवताओं के साथ किसी न किसी जानवरों का संबंध होना पशु संरक्षण का ही प्रतीक है। कुछ इसी तरह की बातें गुरूवार को शहर के चंपासारी के पोकाईजोत स्थित नेशनल पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं के बीच कही गई। मौका था दैनिक जागरण की विशेष मुहिम संस्कारशाला का। गुरूवार को जानवरों के प्रति मानव संवेदना शीर्षक पर नेशनल पब्लिक स्कूल में संस्कारशाला का आयोजन किया गया। दैनिक जागरण की टीम ने उपरोक्त शीर्षक से जुड़ी कई रोचक कहानियां छात्र-छात्राओं को सुनाई। इस मौके पर स्कूल के शिक्षक-शिक्षिका व छात्र-छात्राओं ने भी अपना-अपना विचार प्रकट किया। सबने यह भी कहा कि अभी नहीं संभले तो भविष्य में काफी परेशानी होगी।

अजीत गुप्ता (छात्र) : पर्यावरण के प्रति सजग होना जरुरी है। पशुओं के प्रति भी हमें संवेदनशील होना चाहिए। पशु-पक्षी में मनुष्यों की तरह बोलने की क्षमता नहीं है। उनकी हरकतों से ही उनकी भावना को समझा जा सकता है। बल्कि पशु संरक्षण की दिशा में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना ही काफी है।

स्नेहा कुमारी (छात्रा) : पृथ्वी के सभी जीव-जंतुओं के लिए पर्यावरण संरक्षण बेहद जरूरी है। इनकी सुरक्षा में ही हमारी सुरक्षा निहित है। बल्कि चिड़ियाखाना व सर्कस में जानवरों का इस्तेमाल बंद होना चाहिए। पशु-पक्षी भी पृथ्वी की शोभा हैं।

प्रियंका पाठक (शिक्षिका) : पशु-पक्षी भी प्राकृतिक संसाधनों में से एक हैं। जानवरों के प्रति मनुष्यों को संवेदनशील होना ही चाहिए। हर जीव के प्रति दया भाव रखना ही मानव धर्म है। पशु-पक्षी अपना कर्तव्य नहीं भूलते, बल्कि हम अपने कर्तव्यों से कतराते हैं।

मुस्कान सिंह (छात्रा) : मानव प्रकृति की सबसे उत्तम कृति है। जबकि मानव अपनी हरकतों से पारिस्थितिकी तंत्र को हानि पहुंचा रहा है। पशु-पक्षियों के प्रति मानव को अधिक संवेदनशील होना चाहिए, लेकिन इस मामले में जानवर अभी भी मनुष्यों से आगे हैं। जानवरों के प्रति समाप्त हो रही संवेदना को बनाए रखना आवश्यक है। जानवरों के बिना पृथ्वी की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

प्रियंका शाह (छात्रा) : जानवरों के प्रति लुप्त हो रही मानव संवेदना को जागृत रखना जरूरी है। पशु-पक्षी भी पृथ्वी के अभिन्न घटक हैं। जानवरों के बिना मानव के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती। पशु-पक्षी बोल कर अपनी भावना या जरूरतों को व्यक्त नहीं कर सकते, इसलिए उनकी भावना को समझना हमारी जिम्मेदारी है।

सोनू प्रसाद (शिक्षक) : सभी जीवों के प्रति मानव का संवोदनशील होना आवश्यक है। जानवरों के बिना समाज की संरचना ही मुश्किल है। वर्तमान समय में लोग अपना स्टैंडर्ड बनाए रखने के लिए कीमती कुत्ते व बिल्लियों को पालते हैं। जबकि इनके साथ अपनी भावना नहीं जोड़ पाते। पशु संरक्षण की दिशा में कुछ कड़े कदम उठाना आवश्यक है। जानवरों के बेशकीमती देहावशेषों की तस्करी पर नियंत्रण अत्यावश्यक है। साथ ही जंगलों की अंधाधुंध कटाई पर भी रोक लगनी चाहिए ।

श्रद्धा सुन्दास (शिक्षिका) : पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए विलुप्त हो रहे वन्य जीव व पशु-पक्षियों का संरक्षण जरूरी है। उन्होंने कहा कि पशु संरक्षण की दिशा में सरकार को ध्यान देना चाहिए। इंसान को चाहिए कि जानवरों को भी इंसान की नजर से देखें।

धर्मवीर सिंह (शिक्षक) : जानवरों के प्रति मानव को संवेदनशील होना आवश्यक है। यही मानव धर्म भी है। जंगलों की कटाई व मनुष्यों की अन्य हरकतों की वजह से कई जीव विलुप्त हो गए और कई विलुप्त होने की कगार पर हैं। पशु संरक्षण की दिशा में सरकार के साथ समाज को भी मुहिम चलाने की आवश्यकता है।

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