जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : पूर्वोत्तर सीमा रेल ने पिछले वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान स्क्रैप सामग्रियों की बिक्री से उपार्जन के अपने वाíषक लक्ष्य को पीछे छोड़ दिया। स्क्रैप की बिक्री ई-नीलामी के माध्यम से की गई। इस अवधि के दौरान, पूर्वोत्तर सीमा रेल ने स्क्रैप की बिक्री से 94.64 करोड़ रुपये का उपार्जन किया, जो 75 करोड़ रुपये के निर्धारित लक्ष्य से 26.33 प्रतिशत अधिक है। पूर्वोत्तर सीमा रेल ने पिछले वर्ष के स्क्रैप बिक्री उपार्जन 87.68 करोड़ रुपये से 7.97 प्रतिशत अधिक अíजत किया। विगत वर्ष में कोविड परिस्थितियों के बावजूद उपार्जन में इस वृद्धि को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय रेल ने वित्त वर्ष 2020-21 में अब तक की सर्वोच्च स्क्रैप बिक्री का लक्ष्य हासिल किया। इस बिक्री के जरिए भारतीय रेल ने वर्ष 2019-20 के दौरान 4333 करोड़ रुपये की तुलना में वित्त वर्ष 2020-21 में कुल 4573 करोड़ रुपये उपाíजत किया, जो 5.5 प्रतिशत अधिक है। विगत वर्षो में सर्वोच्च बिक्री वर्ष 2009-10 में 4409 करोड़ रुपये था। भारतीय रेल स्क्रैप सामग्रियों के इस्तेमाल तथा ई-नीलामी के जरिए संसाधनों के अधिकतम उपयोग का सर्वांगीण प्रयास कर रही है।

बेकार/ स्क्रैप रेलवे सामग्रियों का संग्रह तथा बिक्री एक सतत प्रक्रिया है तथा इसकी रेलवे बोर्ड तथा जोनल रेलवे दोनों में विभिन्न स्तरों पर निगरानी की जाती है। रेलवे प्रशासन स्क्रैप सामग्रियों का संग्रह तथा ई-नीलामी के जरिए बिक्री के लिए सर्वांगीण प्रयास करती है। निर्माण परियोजनाओं में साधारण तौर पर स्क्रैप गेज रूपातरण कार्यो से उत्पन्न होती है। ट्रैक नवीनीकरण के दौरान निर्गमित रेल पथ सामग्रिया, जो ट्रैक पर इस्तेमाल के योग्य नहीं है, स्क्रैप करार दिया जाता है। स्क्रैप सामग्रिया अन्य प्रतिस्थापना तथा नवीनीकरण कार्य और सम्पत्तियों के अनुपयोगी होने से उत्पन्न होती है। इन स्क्रैप सामग्रियों को रेलवे के तय नियमानुसार निपटान किया जाता है।

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