जागरण संवाददाता, हावड़ा : पांच साल की एक बच्ची का यौन उत्पीड़न करने के दोषी पाए गए पूलकार चालक को कोर्ट ने छह साल की सश्रम सजा सुनाई है। हावड़ा जिला अदालत के प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल आफेंसेस एक्ट (पॉक्सो) कानून के तहत न्यायाधीश संजीव कुमार दे ने दोषी पूलकार चालक जे मल्लिक को छह साल की सश्रम सजा और 15 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त चार माह जेल में बितानी पड़ेगी।

सरकारी अधिवक्ता सोमनाथ बनर्जी ने बताया कि पीडि़ता डोमजूर स्थित एक स्कूल की केजी की छात्रा है। प्रत्येक दिन वह पूलकार से अपने दो सहपाठियों के साथ घर से स्कूल जाया करती थी। पूलकार चालक जे मल्लिक को बच्चियां चाचा पुकारती थीं। आरोप है कि बाकी दो सहपाठियों के पूलकार से उतर जाने के बाद चालक अक्सर अकेली छात्रा से अश्लीलता पर उतर आता था। 20 फरवरी, 2018 को पीडि़ता अपने दो सहपाठियों के साथ स्कूल गई थी।

स्कूल से लौटने के दौरान बाकी दोनों सहपाठी पूलकार से उतरकर घर चले गए। आरोप है कि पूलकार में अकेले बैठी छात्रा को देख मल्लिक अश्लीलता पर उतर आया। बच्ची का यौन उत्पीड़न किया। घर जाने पर बच्ची के व्यवहार में परिवर्तन देख स्वजनों को चिंता हुई। पूछने पर बच्ची ने पूरी बात बताई। तत्पश्चात पीडि़ता के स्वजन उसके स्कूल गए और पूरी बात बताई। स्कूल से पीडि़त परिवार को कानूनी मदद लेने की सलाद दी गई। बाद में पीडि़त परिवार ने मामले की शिकायत स्थानीय थाने में दर्ज करवाई।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मामला कोर्ट में पहुंचा। लगभग दो साल तक मामला चला। 10 लोगों की गवाही के बाद शनिवार को सुनाए गए फैसले में अदालत ने पूलकार चालक को बच्ची से यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी मानते हुए उसे छह साल की सश्रम सजा दी। 

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Posted By: Preeti jha

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