-अधिकांश की मियाद पूरी,फिटनेस तक नहीं

-पुलिस की 25 पेट्रोलिंग वैन भी खटारा की श्रेणी में

-बीएस 2 गाड़ियों की प्रदूषण जांच 2005 से बंद

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट व डम्पिंग ग्राउंड के अलावा सिलीगुड़ी में प्रदूषण के और भी कई कारण हैं। इसमें काफी पुरानी और खटारा गाड़ियों को भी शामिल किया जा सकता है। या कहें तो सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट व डम्पिंग ग्राउंड के बाद पुरानी गाड़ियां शहर में प्रदूषण का तीसरा बड़ा कारण है। सिटी ऑटो की हालत काफी खस्ताहाल है। हांलाकि प्रशासन ने इनके खिलाफ निर्णय ले लिया है। सिटी ऑटो को बदलने का काम शुरू हो गया है। जबकि पुराने ट्रक, बस,कार के अलावा सरकारी गाड़ियां काला धुंआ फैलाते हुए सड़कों पर बेलगाम दौड़ रही है। इसमें भी माना जा रहा है कि सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस की पुरानी गाड़ियां शहर को अधिक प्रदूषित कर रही है। लोग बोलचाल की भाषा में ऐसी पुरानी गाड़ियों को डग्गामार गाड़ियां कहने लगे हैं। जबकि प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार ने बीएस-2 मॉडल की गाड़ियों को बदलकर बीएस-4 मॉडल करना अनिवार्य किया है। अब तो बीएस मॉडल-6 की गाड़ियां भी आने वाली है।

पुरानी गाड़ियों से प्रदूषण का आलम यह है कि यदि कोई दुपहिया वाहन चालक किसी सिटी ऑटो, ट्रक या बस के पीछे पड़ गया तो उसका सांस लेना मुश्किल हो जाता है। साथ ही काले धुएं से मुंह और शरीर तो छोड़ दें कपड़े तक की हालत रद्दी हो जाती है। विशेषज्ञों की मानें तो पुरानी गाड़ियों के इंजन से निकलने वाला काला धुंआ वायु मंडल के लिए काफी खतरनाक है। नियमानुसार किसी भी गाड़ी की मियाद 15 वषरें की ही होती है। समय के साथ सिलीगुड़ी की जनसंख्या बढने के साथ शहर में वाहनों की संख्या भी काफी बढ़ी है। वायु प्रदूषण के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार सिटी ऑटो, सिटी बस व पुलिस की गाड़ियां हैं। अगर आंकड़ो की बात करें तो सिलीगुड़ी व आस-पास के इलाके में सड़को पर कुल 1300 सिटी ऑटो की आवाजाही होती है। वहीं सड़कों पर करीब 700 सिटी बसें चलती हैं। इनमें से अधिकांश गाड़ियों की मियाद पूरी हो चुकी है। अधिकांश गाड़ियां 15 साल से अधिक पुरानी हो चुकी है।

बल्कि इनमें से कई गाड़ियों का फिटनेस भी समाप्त हो गया है। अर्थात ऐसी गाड़ियां सड़कों पर चलने के काबिल तक नहीं हैं। इसके अतिरिक्त अधिकांश के बीमा व टैक्स भी अपडेट नहीं है। बीमा व सरकार को टैक्स दिए बिना गाड़ियां सड़कों पर नहीं दौड़ सकती है। इधर, सिटी बस ऑनर्स एसोसिएशन के एक सदस्य ने दावा किया कि एकाध को छोड़कर अधिकांश बसों में सभी आवश्यक कागजात होते हैं। यह भी सही है कि पुरानी बसें भी दौड़ती हैं। मियाद पूरी हुई गाड़ी मालिकों को एसोसिएशन की ओर सतर्क किया गया है। वहीं सिटी ऑटो एसोसिएशन के सचिव निर्मल सरकार ने बताया कि वर्ष 2020 तक सभी सिटी ऑटो की मियाद पूरी हो जाएगी। वर्ष 2005 के बाद नई ऑटो सड़क पर नहीं उतरी है। सभी ऑटो बीएस-2 मॉडल की है। बीते दो वर्षो से बीएस-3 व बीएस-4 मॉडल आने की वजह से प्रदूषण सर्टिफिकेट नहीं मिल रहा है। बीएस-3 व बीएस-4 मॉडल के मशीन से बीएस-2 मॉडल की गाड़ियों का प्रदूषण जांच करना संभव नहीं है। प्रदूषण सर्टिफिकेट के अभाव में फिटनेस भी खत्म हो गया। राज्य सरकार ने बीएस-2 मॉडल की सभी ऑटो को बदलकर बीएस-4 मॉडल की गाड़ियां ला रही है। शहर में फिलहाल आठ नई गाड़ियां उतारी गई है। पुलिस की गाड़ियों पर सरकार का ध्यान नहीं

इससे भी बदतर हालत सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नरेट के गाड़ियों की है। सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नरेट के अधीन कुल 8 थाने व छह पुलिस चौकी हैं। सभी थानों व पुलिस चौकियों को मिलाकर कुल 25 पेट्रोलिंग वैन हैं। इसके अलावा सभी थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी के लिए गाड़ी है। आरोपियों को अदालत ले जाने-आने के लिए वैन है। पुलिस कमिश्नर व अन्य आला अधिकारियों के लिए लक्जरी गाड़ियां हैं। इधर,सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस थानों व चौकियों के अधिकांश गाड़ियों की मियाद तो छोड़िए फिटनेस तक समाप्त है। कई पेट्रोलिंग वैन की स्थिती इतनी जर्जर हो चली है कि चोर भी ना चुराए। इंश्योरेंस फेल होने की भी शिकायत मिलती है। आरोपियों को ले जाने-आने के क्रम में यदि कोई दुर्घटना होती है तो आरोपी की छोड़िए पुलिस कर्मचारी तक को मुआवजा भी नहीं मिलेगा। इस दिशा में सरकार का भी कोई ध्यान नहीं है। इस संबंध में पुलिस कमिश्नर से लेकर आला अधिकारियों ने बयान नहीं दिया।

Posted By: Jagran

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