सिलीगुड़ी, जासं। पड़ोसी बांग्लादेश के साथ भले ही भारत के मधुर संबंध रहे हों, लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि यदि कोई बांग्लादेश की यात्रा करना चाहे तो वीजा लेने में ही पसीना निकल जाता है। एक अनुमान के मुताबिक सिलीगुड़ी तथा उत्तर बंगाल से हर साल करीब 15 से 20 हजार लोग बांग्लादेश जाते हैं। इनमें न केवल कारोबारी बल्कि बड़ी संख्या में पर्यटक भी शामिल हैं।

यह संख्या और भी बढ़ सकती है बशर्ते वीजा मिलने में आसानी हो। जबकि ऐसा हो नहीं रहा है। वीजा मिलने में परेशानी के कारण लोग बांग्लादेश जाने से कतराते हैं। जिसकी वजह से दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात का कारोबार तो प्रभावित हो ही रहा है, साथ ही बांग्लादेश जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या भी नहीं बढ़ रही है। मिली जानकारी के अनुसार बांग्लादेश जाने के लिए वीजा के लिए सिलीगुड़ी तथा उत्तर बंगाल के लोगों को या तो कोलकाता या फिर त्रिपुरा के अगरतला जाना पड़ता है।

ऐसे लोगों की भी संख्या काफी है, जो दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन जाकर वीजा लेते हैं। इसमें न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि पैसे भी काफी खर्च होते हैं। पश्चिम बंगाल के लोगों का बांग्लादेश के साथ एक भावनात्मक संबंध भी है। देश के बंटवारे के पहले पूरा बंगाल एक था। बंटवारे के बाद पहले पाकिस्तान और फिर बाद में पाकिस्तान से निकलकर बांग्लादेश एक अलग देश बन गया। पश्चिम बंगाल तथा बांग्लादेश की भाषा एवं संस्कृति एक है। ऐसे लोगों की संख्या भी काफी अधिक हैं, जिनके परिवार के लोग या तो इस पार या फिर उस पार बांग्लादेश में है।

अधिकारिक सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ वर्षो के दौरान पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश जाने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। खासकर आयात निर्यात कारोबारी लगातार बांग्लादेश आते-जाते हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के काफी पर्यटक भी बांग्लादेश जाते हैं। वहां से भी भारत आने वाले लोगों की संख्या काफी बढ़ी है। हाल के दिनों में बांग्लादेशी पर्यटकों को पड़ोसी राज्य सिक्किम आने की अनुमति भी मिल गई है। पहले बांग्लादेशी पर्यटकों के सिक्किम जाने की मनाही थी। अब केंद्र सरकार ने बांग्लादेशी पर्यटकों को सिक्किम जाने की भी मंजूरी दे दी है। जिससे बांग्लादेशी पर्यटकों के आगमन में लगातार वृद्धि हो रही है।

कहते हैं कि जितनी आसानी से बांग्लादेशी लोगों को वीजा मिल जाता है, उतनी आसानी से पश्चिम बंगाल के लोग वीजा हासिल नहीं कर पाते। जबकि पश्चिम बंगाल में ऐसे लोगों की संख्या काफी अधिक है, जो सिर्फ बांग्लादेश जाने के लिए ही पासपोर्ट बनाते हैं। जबकि वीजा बनाने के लिए कई बार बांग्लादेशी हाई कमीशन का चक्कर लगाना पड़ता है। ऐसा भी नहीं है कि वीजा प्रक्रिया आसान बनाने की मांग नहीं उठी है।

खासकर सिलीगुड़ी तथा उत्तर बंगाल के लोग काफी दिनों से सिलीगुड़ी में ही बांग्लादेशी वीजा देने की मांग करते रहे हैं। एक बार यदि बांग्लादेश सरकार सिलीगुड़ी में वीजा की व्यवस्था कर दे तो उत्तर बंगाल के लोगों को वीजा के लिए कोलकाता, दिल्ली अथवा अगरतला का चक्कर नहीं लगाना होगा।

उल्लेखनीय है कि भारत और बांग्लादेश के बीच आवागमन की सुविधा भी काफी बढ़ गई है। एशियन हाई-वे टू का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। यह हाई-वे नेपाल को बांग्लादेश सीमा फूलबाड़ी से जोड़ता है। यही वजह है कि बांग्लादेश आने-जाने के लिए फूलबाड़ी सीमा की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। अगर सिलीगुड़ी में वीजा बनने लगे तो यहां के लोगों को बांग्लादेश जाने के लिए हिली,चेंगराबांधा अथवा महादेवपुर नहीं जाना होगा। इस संबंध में हिमालयन हॉस्पिलिटी एंड टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड के महासचिव सम्राट संयाल ने कहा है कि वह लोग काफी दिनों से सिलीगुड़ी में ही बांग्लादेशी वीजा जारी करने की व्यवस्था करने की मांग करते रहे हैं। उनकी मांगों पर अबतक ध्यान नहीं दिया गया है। वीजा समस्या के कारण दोनों देशों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। जिसका नुकसान भारत से ज्यादा बांग्लादेश को हो रहा है।

उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। बहरहाल,अब इस समस्या के समाधान की उम्मीद है। बांग्लादेश ने सिलीगुड़ी में वीजा केंद्र बनाने की योजना बनाई है। कोलकाता में बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमिशन के प्रथम सचिव मोहम्मद मोफाकरूल इकबाल ने बताया है कि वीजा मिलने में परेशानी की जानकारी उन्हें भी मिली है। यदि सिलीगुड़ी में ही वीजा मिल जाये तो ना केवल सिलीगुड़ी बल्कि पूरे उत्तर बंगाल के लोगों को सुविधा होगी। वह एक प्रस्ताव स्वदेश लौटकर सरकार को देंगे। उसके बाद दोनों देशों के सरकारों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत होगी।

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Posted By: Preeti jha