-रोजगार के लिए दूसरे तरीके अपनाने पर मजबूर

-सबसे बुरी हालत ठेला लगाने वालों की

-घर-घर जाकर सब्जी बेचने का काम शुरू किया

-चिकन का काम करने वालों की हालत तो और भी खराब

-जितने पैसे मिली जाएं उसी में मुर्गी देने को तैयार मोहन झा, सिलीगुड़ी: कोरोना की वजह से व्यापार जगत को काफी नुकसान हो रहा है। खास कर छोटे व खुदरा व्यपरियों की कमर टूट रही है। ऐसे में एक के बाद एक छोटे व खुदरा व्यापारी अपना व्यापार बदल रहे हैं। फ़ास्ट फ़ूड वाले सब्जी, लॉटरी वाले मास्क और मुर्गी पालन करने वाले किसान घर-घर घूम कर अंडे बेच रहे हैं।

कोरोना से बचने के लिए लॉकडाउन जारी है। बाजार पूरी तरह से बंद है। राशन-पानी, फल-सब्जी और दवाई आदि आवश्यक सामनों की दुकाने दिन में सीमित समय के लिए खुल रही है। हार्डवेयर, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामनों के बाजार बिल्कुल बंद है। लॉकडाउन की इस स्थिति में खुदरा कारोबारियों और हॉकरों के सामने गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। फ़ास्ट फ़ूड, लॉटरी टिकट बेचने वाले, व अन्य सामनो की फेरी करने वालों के परिवार में खाद्य संकट हावी होता दिखने लगा है। कोई और रास्ता ना पाकर खुदरा व्यापारी और हॉकर अपना व्यापार ही बदल रहे हैं। गुजारा करने के लिए इन लोगों ने भी सब्जी और फल बेचना या फिर मास्क बेचना शुरु किया है। लॉकडाउन की इस स्थिति में राशन और सब्जी, फल और मास्क का व्यापार ही चल रहा है। बल्कि दर्जियों ने घर में ही मास्क बना कर बेचना शुरू कर दिया।

इस समय सुबह के समय शहर के किसी भी इलाके व गलियों में ठेला पर फल-सब्जी बेचने वाले दिखते हैं। बल्कि लॉटरी का टिकट बेचने वाले उसी टेबल पर मास्क रख कर बेचते नजर आते हैं। बाज़ारों के नजदीक व इलाके के नुक्कड़ों पर मुर्गियों से लदी पिकअप वैन ग्राहकों के इंतज़ार में लगी रहती है। कोरोना से आतंकित इस बाजार में सबसे सस्ता तो मुर्गी ही है।

फ़ास्ट फ़ूड छोड़ कर सब्जी का ठेला लेकर घूमने वाले एक बिक्रेता कल्याण बर्मन ने बताया कोरोना की वजह से सरकार ने लॉकडाउन करा दिया है। इस स्थिति में फ़ास्ट फ़ूड की दुकान भी बंद करनी पड़ी है। दुकान बंद होने से अपना और परिवार का पेट पालने के लिए सब्जी बेचने के अलावा दूसरा कोई रास्ता भी नहीं है। बल्कि इस समय लोग अपने घरों से कम निकल रहे हैं। इसलिए फ़ास्ट फ़ूड के ठेले पर सब्जी लेकर इलाके-इलाके घूम आते हैं। वहीं शहर से सटे सटे खोरीबाड़ी इलाके में लॉटरी बेचने के टेबल पर एक व्यक्ति को कपड़े का मास्क बेचते देखा गया। नाम बताने को अनिच्छुक उस मास्क दुकानदार ने बताया कि फिलहाल तो लॉटरी का व्यापार बंद है। ऐसे में उपार्जन का कोई और रास्ता तो तलाशना ही था। कोरोना से आतंकित इस समय मे मास्क की काफी माग है। बल्कि बाजार में मास्क मिलना भी दुर्लभ है। इसलिए स्थानीय एक दर्जी अपने घर मे ही कपड़े का मास्क बनाता है। उसी से मास्क लेकर बाजार में बेच रहा हूं। शहर व आसपास के बाज़ारो में मुर्गी की कीमत काफी कम है। कहीं 50 रुपया प्रति किलो मांस तो कहीं 50 रुपये प्रति मुर्गी उपलब्ध है। बल्कि बाजार से सटे व इलाके के नुक्कड़ों पर मुर्गी से लदी पिकअप वैन खड़ी रहती है और प्रति मुर्गी जो ही मिल जाए व्यापारी बेच रहे हैं। खोरीबाड़ी में मुर्गी पालन करने वाले एक व्यापारी ने बताया कि इस सीजन में मुर्गी पालन में प्रति किलो करीब 30 रुपये का खर्चा होता है। ऐसे में 50 रुपये प्रति किलो बेचने से भी कोई ज्यादा नुकसान खुदरा व्यापारियों को नहीं होगा। बल्कि गली और नुक्कड़ पर गाड़ी लगाकर मुर्गी पालन करने वाले व्यापारी ही बेच रहे हैं। समय पूरा होने के बाद उसे रखना किसानों के लिए नुकसान ही है।

Posted By: Jagran

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