जागरण संवाददाता, कोलकाता। बंगाली फिल्म डायरेक्टर श्रीजीत मुखर्जी ने गुमनामी 'द ग्रेटेस्ट स्टोरी नेवर टोल्ड' नाम से एक फिल्म बनाई है, जिसका टीजर एसवीएफ एंटरटेनमेंटप्रॉडक्शन के बैनर तले 14 अगस्त यानी बुधवार को यूट्यूब पर डाला गया है।

उधर फिल्म बनाने वाले श्रीजीत मुखर्जी को देबब्रत रॉय नाम के शख्स के वकील ने इस मामले में एक नोटिस भेजा है। यह फिल्म 2 अक्टूबर को रिलीज हो रही है। देबब्रत रॉय की ओर से उनके वकील ने श्रीजीत मुखर्जी को नोटिस देते हुए कहा है कि गुमनामी बाबा फिल्म में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कहानी का चित्रण करते वक्त वह तथ्यों के प्रदर्शन में खास ख्याल रखें।

बता दें कि फैजाबाद जिले में रहने वाले साधु को पहले लोग भगवानजी और उसके बाद में गुमनामी बाबा के नाम से जानते थे। 1945 से पहले नेताजी से मिल चुके लोगों ने गुमनामी बाबा से मिलने के बाद दावा किया था कि वही नेताजी थे।

मुखर्जी कमिशन ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फैजाबाद के भगवनजी या गुमनामी बाबा और नेताजी सुभाषचंद्र बोस में काफी समानताएं थीं। अयोध्या के राम भवन के मालिक शक्ति सिंह के मुताबिक गुमनामी बाबा ने जिंदगी के आखिरी तीन साल (1982-85) वहां गुजारे।

पहले बक्से में जैसा नेताजी पहनते थे उसी तरह का गोल फ्रेम का एक चश्मा, नेताजी जेब में जिस तरह की घड़ी रखते थे उस तरह की एक रोलेक्स घड़ी के अलावा कुछ खत मिले, जो नेताजी के फैमिली मेंबर ने लिखे थे। इसमें अखबारों की कतरन भी थी, जिनमें नेताजी के बारे में छपा था। आजाद हिंद फौज का यूनिफॉर्म, सिगरेट, पाइप, कालीजी की फ्रेम की गई तस्वीर और रुद्राक्ष मालाएं भी बक्से में मिलीं।

एक झोले में बांग्ला और अंग्रेजी में लिखी 8-10 साहित्यिक किताबें मिलीं। दूसरे बक्से में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की फैमिली फोटोज मिलीं। इसके साथ ही तीन घड़िया- रोलेक्स, ओमेगा और क्रोनो मीटर के अलावा तीन सिगारदान मिले। एक फोटो में नेताजी के पिता जानकीनाथ, मां प्रभावती देवी, भाई-बहन और पोते-पोती नजर आ रहे हैं। 

Posted By: Preeti jha

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