सिलीगुड़ी, जागरण संवाददाता। West Bengal: शहर के नजरुल सरणी में पाकुड़तला मोड़ स्थित न्यू रामृकष्णा सेवा सदन नर्सिग होम में एक महिला को जन्मी मात्र 490 ग्राम वजनी नवजात कन्या संतान को नई जिंदगी मिली है। इस कन्या का प्राकृतिक समय नौ महीने से पूर्व छह महीने आठ दिन में ही गत 19 अक्टूबर को नॉर्मल डिलीवरी के माध्यम से जन्म हुआ। मगर, इसका वजन मात्र 490 ग्राम था जो कि अत्यंत चिंतनीय था।  उसका वर्तमान वजन लगभग एक किलोग्राम है।

आम तौर पर ऐसे नवजात के बच पाने की उम्मीद बहुत कम होती है। पर, उक्त नर्सिग होम के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गोपाल खेमका की लगन भरी चिकित्सा रंग लाई और बच्ची बच गई। इस दिन पूरे दो महीने एक दिन की उम्र में उक्त कन्या संतान को नर्सिग होम से छुट्टी मिल गई। उसके मां-बाप बच्ची को घर ले गए।

हालांकि अभी भी कई महीने तक उसकी विशेष देखभाल करनी होगी। न्यू रामृकष्णा सेवा सदन नर्सिग होम के कर्ता-धर्ता स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. जी. बी. दास ने शुक्रवार को नर्सिग होम में संवाददाता सम्मेलन कर यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि वह सिलीगुड़ी में गत 40 सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। अब तक लगभग चालीस हजार डिलीवरी करवा चुके हैं। मगर, यह अब तक उनकी नजर का यहां ऐसा पहला मामला है कि इतने कम वजन की संतान जन्मी। वैसे बड़ी खुशी की बात है कि नवजात बच्ची अभी स्वस्थ है। उसका वर्तमान वजन लगभग एक किलोग्राम है। समय के साथ इसमें और सुधार होगा। उसे नई जिंदगी मिली है। वह बरकरार रहे। अपनी बच्ची की इस नई जिंदगी के लिए बच्ची की माता पेशे से सरकारी शिक्षिका संगीता सांतरा व पिता पेशे से मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव प्रदीप नंदी ने डॉक्टरों के प्रति हार्दिक आभार जताया है।

Posted By: Preeti jha

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