कहा, डॉलर की मजबूती के चलते गिरा रुपये का भाव

-अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार चढ़ाव से भारत मुकाबले को है तैयार

-अमेरिका द्वारा तुर्की और ईरान पर लगाए गये व्यापारिक प्रतिबंध का भी दिख रहा असर

जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : भारतीय रुपया इस समय भारी दबाव में है और डॉलर के मुकाबले लगातार गिरता चला जा रहा है। एक डॉलर की कीमत 72 रुपये हो गई थी, अब भी यह 71 रुपये से ज्यादा है। इस वर्ष अबतक रुपया नौ प्रतिशत तक गिर चुका है। रुपये के भाव का गिरने से कारोबारियों और निवेशकों को डर दिखाया जा रहा है। रुपये की गिरावट चिंता का विषय है, परंतु भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।

यह विचार सोमवार को दैनिक जागरण कार्यालय पर आयोजित जागरण विमर्श कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आर्थिक मामले के जानकार व निवेश सलाहाकार प्रवीण अग्रवाल ने व्यक्त किए। आज का विषय था 'गिरता रुपया कितना हानिकारक?'। उन्होंने बताया कि आयातित सामान की कीमतें बढ़ गई हैं और वे सामान महंगे हो गये हैं। जिन्हें विभिन्न कंपनियां अपने उत्पादों के लिए इस्तेमाल करती हैं। इससे उनका बजट गड़बड़ाने लगा है। डॉलर के लगातार महंगा होते जाने से हमारा आयात बिल भी अधिक होने लगा है। उन्होंने कहाकि रुपये में आइ गिरावट के पीछे अमेरिका द्वारा तुर्की और ईरान पर लगाया व्यापारिक प्रतिबंध है। ऐसा करने पर दोनों देशों की मुद्राएं चारों खाने चित्त हो गई। तुर्की का लीरा तो 50 प्रतिशत नीचे चला गया। इसके अलावा अर्जेटीना का पैसा भी लुढ़क गया। कई अन्य देशों की मुद्राएं भी दबाव में आ गई। चीनी मुद्रा युआन पर भी दबाव में है व गिर भी रहा है। उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर डॉलर का दबाव साफ दिख रहा है। अर्थशास्त्र की बातें माने तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था में इस समय तेजी दिखने लगी है। पिछले कुछ महीनों के आंकड़े बता रहे हैं कि उसकी अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। डॉलर महंगा होने लगा है। इसका असर हुआ कि विदेशी संस्थागत निवेशक भारत जैसे देश से अपना पैसे निकाल रहे हैं। यह पैसा बांड और शेयरों में लगा हुआ था। पिछले चार महीनों में औसतन हर महीने डेढ़ अरब डॉलर की निकासी हुई है। भारत में जब विदेशी निवेशक पूंजी लाते हैं तो डॉलर में होता है। डॉलर आने से रुपये की कीमत बढ़ती है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाकार वहां का माहौल आकर्षक बना दिया है। वहां यह उम्मीद की जा रही है कि आगे भी ब्याज दरें बढ़ेगी। इसलिए क्योंकि डॉलर में निवेश फायदे मंद होगा। यही कारण है कि भारत जैसी अर्थ व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है, जहां विदेशी निवेशक अभी पूंजी लगाने से कतरा रहे हैं। अग्रवाल ने बताया कि रुपये गिरने से देश के लोगों को भयभीत इसलिए नहीं होने की जरूरत है क्योंकि भारत के पास विदेशी मुद्रा भंडार 400 अरब डॉलर का है इससे अर्थ व्यवस्था के मजबूत होने का संकेत मिलता है। इसके कारण आइटी और फॉर्मा क्षेत्र को फायदा होगा। देश के पास डॉलर का इतना बड़ा भंडार होने से सरकार को आगे के लिए विश्वास है कि रुपया और नहीं गिरेगा। रुपये के भाव गिरने से मात्र 20 प्रतिशत निर्यातकों को लाभ हो रहा है। आयात करने वाले घाटे में है। रुपये की गिरावट से कार निर्माता कंपनियों तथा अन्य कंपनियों का अपने दाम बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है। भारत जैसे आयातक देश में मुद्रास्फीति बढ़ेगी। प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि चीन जैसा देश जो पूर्ण रूप से निर्यातक देशों में है, उसके लिए मुद्रा का गिरना अच्छी बात है, परंतु भारत के लिए यह ठीक नहीं है। रिजर्व बैंक ने पहले रुपये को गिरने से रोकने के लिए बाजार में हस्तक्षेप किया था, लेकिन अब वह चुप्पी साधकर बैठा है। उन्हें आगे बढ़कर लोगों के बीच अपनी बातें रखनी चाहिए। जागरण विमर्श में अतिथि का स्वागत दैनिक जागरण सिलीगुड़ी यूनिट के वरिष्ठ समाचार संपादक गोपाल ओझा ने किया। आए अतिथि का आभार व्यक्त यूनिट हेड राजन मिश्रा ने किया। विमर्श में राजेश पटेल, राघवेंद्र शुक्ला, अशोक झा आदि मौजूद थे।

Posted By: Jagran