कोलकाता, जागरण संवाददाता।  बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिलांतर्गत दांतन के संतोषपुर में शुक्रवार को भाजपा कार्यकर्ता बरसा हांसदा का शव पेड़ से लटकता मिला। भाजपा का दावा है कि बरसा आदिवासी समुदाय से उनका सक्रिय कार्यकर्ता था, जिसकी बेरहमी से हत्या कर शव पेड़ पर लटका दिया गया।

भाजपा का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनके कार्यकर्ता की हत्या की है। इस घटना पर प्रदेश भाजपा ने ट्वीट कर सवाल उठाते हुए कहा है कि तृणमूल कांग्रेस शासित इस राज्य में इस तरह क्रूर राजनीतिक हत्याओं पर उदारवादी अब तक चुप क्यों हैं? यदि यह भाजपा शासित राज्य होता तो क्या वे चुप रहते?

जानें, कब और कहां हुई ऐसी घटनाएं

गौरतलब है कि गत अगस्त माह में 19 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता पिंटू मन्ना का शव पश्चिम मिदनापुर जिले के पिंगला में पेड़ से लटका मिला था। उसके परिवार वालों ने हत्या के लिए तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया था।

अगस्त में बीरभूम जिले में उपद्रवियों द्वारा बम फेंकने से 50 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता दलू शेख की मृत्यु हो गई थी। स्थानीय बाशिंदों का आरोप था शेख की हत्या करने वाले बदमाश तृणमूल के थे। इस मुद्दे पर भाजपा के महासचिव सायंतन बसु ने कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को समय-समय पर तृणमूल कार्यकर्ताओं द्वारा साजिश के तहत निशाना बनाया गया है।

सितंबर माह में, बीरभूम जिले के नानूर थानान्तर्ग तहत रामकृष्णपुर गांव में हमलावरों द्वारा एक सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता स्वरूप गोराई को गोली मार दी गई थी। तब भी भाजपा ने हमले के लिए तृणमूल को दोषी ठहराया था। गंभीर रूप से घायल गोराई की दो दिन बाद अस्पताल में मौत हो गई थी।

जानिए, किसने क्या कहा

आतंक फैलाना तृणमूल का हमेशा से राजनीतिक मंत्र रहा है, जोकि बेहद शर्म की बात है। ममता बनर्जी के शासनकाल में बंगाल में लोकतंत्र नहीं है। लोकतंत्र के लिए भाजपा लगातार आंदोलन कर रही है।

-मुकुल राय, भाजपा नेता।

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भाजपा कार्यकर्ता की तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने हत्या की है। डर पैदा करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

-कैलाश विजयवर्गीय, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश के प्रभारी।

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