सिलीगुड़ी [राजेश पटेल]। वह दिन दूर नहीं, जब आप दार्जीलिंग घूमने जाएंगे तो मुर्गे की एक विशेष प्रजाति कड़कनाथ के मांस का लुत्फ ले पाएंगे। पश्चिम बंगाल सरकार दार्जिलिंग के पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय लोगों का जीविकोपार्जन सुनिश्चित करने के लिहाज से कड़कनाथ मुर्गा पालन को बढ़ावा देने के लिए पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। हालांकि अभी भी इसका पालन होता है, लेकिन व्यापक पैमाने पर नहीं। 
राज्य स्वरोजगार विभाग की ओर से बताया गया है कि पश्चिम बंगाल स्वरोजगार कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डब्ल्यूबीएससीएल) मुर्गा पालन के लिए आर्थिक अनुदान दे रहा है। कड़कनाथ मुर्गे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका स्वाद बेहद लजीज होता है और पोषण भी इस के मांस में प्रचुर मिलता है। इसकी वजह से बड़ी संख्या में लोग कड़कनाथ मुर्गे को खाना पसंद करते हैं।
बता दें कि राज्य स्व-सहायता समूह और स्व-रोजगार विभाग से जुड़ी राज्य विधानसभा की स्थायी समिति ने हाल ही में दार्जिलिंग का दौरा किया और पाया कि लगभग एक दर्जन परिवारों ने सफल तरीके से कड़कनाथ मुर्गे का पालन शुरू किया है।
क्या है इसकी खासियत
चिकन खाने के बहुत नफे-नुकसान के बारे में आपने सुना-पढ़ा होगा। लेकिन कड़कनाथ चिकन की एक ऐसी वैरायटी है जिसका गोश्त खाने से आपको फायदा ही फायदा होगा। औषधीय गुण, कम फैट और हमेशा याद रहने वाला लजीज स्वाद के लिए कड़कनाथ से बेहतर और कुछ नहीं हो सकता है। इसीलिए ठंड के दिनों में इसकी मांग बढ़ जाती है।  इसके फायदे के कारण इसकी मांग देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है।
इसका चिकन शक्तिवर्धक
इसका मांस, चोंच, जुबान, टांगे, चमड़ी आदि सब कुछ काला होता है। यह प्रोटीनयुक्त होता है और इसमें वसा नाममात्र रहता है। कहते हैं कि दिल और डायबिटीज के रोगियों के लिए कड़कनाथ बेहतरीन दवा है। इसके अलावा कड़कनाथ को शक्तिवर्धक भी माना जाता है। इसके अलावा इसमें विटामिन बी1, बी2, बी6 और बी12 भरपूर मात्रा में मिलता है। इसका मांस खाने से आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।
तीन तरह की प्रजाति होती है
कड़कनाथ मुर्गे की प्रजाति के तीन रूप हैं। पहला जेड ब्लैक, इसके पंख पूरी तरह काले होते हैं। पेंसिल्ड, इस मुर्गे का आकार पेंसिल की तरह होता है। पेंसिल्ड शेड मुर्गे के पंख पर नजर आते हैं। जबकि तीसरी प्रजाति गोल्डन कड़कनाथ की होती है। इस मुर्गे के पंख पर गोल्ड छींटे दिखाई देती हैं।
लजीज चिकन की वजह से कड़कनाथ मध्यप्रदेश के झाबुआ और धार इलाके में बहुतायत में पाया जाता है। जबकि छत्तीसगढ़, राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में यह मिलता है। हालांकि इसकी मांग अब देश के कोने-कोने से आ रही है। कर्नाटक, हैदराबाद, उत्तर प्रदेश के लोग कड़कनाथ के चूजे लेना चाहते हैं। हालात यह है कि झाबुआ के कृषि विज्ञान केंद्र स्थित हैचरी में कड़कनाथ के चूजे लेने के लिए महीनों की वेटिंग चलती है। कड़कनाथ की कीमत भी है कड़क
इस प्रजाति के मुर्गी के अंडे काफी महंगे होते हैं। इसका एक अंडा करीब 50 रुपये में बिकता है जबकि एक कड़कनाथ मुर्गे की कीमत 900 से 1200 रुपये प्रति किलो तक होती है। मुर्गी की कीमत 3000 से लेकर 4000 के बीच होती है।
ठंडी तासीर वाली ग्रेवी में पकाया जाता है
कड़कनाथ मुर्गे की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे ऐसी ग्रेवी के साथ पकाया जाता है, जिसकी तासीर ठंडी हो। इसमें मुर्गे को पहले उबाला जाता है और ग्रेवी को अलग से बनाया जाता है। इसमें घी, हींग जीरा मेथी, अजवाइन, साथ ही धनिया पाउडर डाला जाता है। इसके बाद दोनों को मिलाकर मुर्गे को पकाया जाता है। यह पकने में आम मुर्गे से ज्यादा वक्त लेता है। हालांकि इसका मांस काफी नर्म होता है, अच्छी तरह पकने के बाद इसका मांस आसानी से चबाया जा सकता है।
रोस्टेड तरीके से भी बना सकते हैं
कड़कनाथ मुर्गे के चिकन को रोस्टेड तरीके से भी बनाया जा सकता है। इस विधि में चिकन पीसेस को गर्म मसालों में मिलाकर एक नर्म कपड़े से लपेटा जाता है। इसे आटे से अच्छी तरह से लपेटकर कवर किया जाता है। इसके बाद इसे आंच पर या अंगारों पर रखकर भूना जाता है। 15-20 मिनट तक भूनने के बाद आटे और कपड़े की परत हटाकर खाया जाता है। 

Posted By: Rajesh Patel

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