-लीज पर मिली जमीन के आसपास खाली जमीन पर कब्जा

-भारत-नेपाल सीमा पानीटंकी में नया मार्केट बनाने की तैयारी

-एक दुकान के लिए जमीन की कीमत 15 लाख

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एक्सक्लुसिव

200 करोड़ की उगाही का खेल-1

पिछले साल राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जब भूमाफिया या कहें जमीन माफिया पर नकेल कसने का निर्देश दिया था,काफी खलबली मच गई थी। जहां एक ओर कई भूमाफिया जेल भेजे गए थे,तो कई अंडर ग्राउंड हो गए थे। बाद में मामला ठंडा होने पर सभी धीरे-धीरे प्रकट होते चले गए। जमीन माफिया की सक्रियता एक बार फिर से बढ़ गई है। भारत-नेपाल सीमा पर करीब 40 बीघा सरकारी जमीन पर जमीन माफिया ने कब्जा कर लिया है और करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे की तैयारी कर ली है। हम आने वाले कई दिनों तक इनका काला चिट्ठा खोलेंगे। कहां है यह जमीन,कैसे हो रहा है जमीन हड़पने का खेल और कौन लोग हैं इसमें शामिल,इस पूरे मामले का खुलासा हम करेंगे।

----------------- जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी से सटे भारत-नेपाल सीमांत इन दिनों भूमाफिया का गढ़ बना हुआ है। सीमांत से सटे करीब 40 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर मार्केट बनाने की तैयारी कर ली गई है। इसके लिए इलाकाई भूमाफिया का एक गुट सक्रिय हुआ है। हालांकि इस जमीन को हथियाने की प्रक्रिया वर्ष 2018 में ही शुरु हो गई थी। इस सरकारी जमीन पर मार्केट बना कर करीब दो सौ करोड़ रुपये से भी अधिक की उगाही करने का पूरा रोड मैप तैयार हो चुका है।

पानीटंकी में भारत और नेपाल के बीच मेची नदी बहती है। मेची नदी पर बना ब्रिज ही दोनों देशों की सीमा है। इसी ब्रिज करीब 40 बीघा जमीन पर भूमाफिया ने अपनी गिद्ध दृष्टि जमा ली है। जब पूरे मामले की छानबीन की गई तो मेची ब्रिज की ओर जाने वाली पुरानी सड़क और एशियन हाईवे-2 के फ्लाइओवर के बीच यह जमीन स्थित है। जानकारी के मुताबिक इस जमीन को हथियाने के लिए वर्ष 2013 में ही मेची मार्केट व्यवसायी वेलफेयर एसोसिएशन बनाया गया। एसोसिएशन को पश्चिम बंगाल सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट-1961 के तहत पंजीकृत कराया गया। इसके बाद इस जमीन की लीज देने के लिए बीएल एंड एलआरओ,खोरीबाड़ी कार्यालय में अपील की गई। इसके बाद बीएल एंड एलआरओ खोरीबाड़ी ने गंडगोल और उत्तर रामधन मौजा मिलाकर कुल 7.92 एकड़ सरकारी भेस्ट जमीन को लीज पर देने का प्रस्ताव दार्जिलिंग के डीएल एंड डीआरओ को दिया। दार्जिलिंग डीएल एंड एलआरओ ने 4 जुलाई 2018 को एक रिपोर्ट पश्चिम बंगाल भूमि व भूमि सुधार विभाग को भेजा। इसी रिपोर्ट के आधार पर 24 फरवरी 2020 को मेची मार्केट व्यवसायी वेलफेयर एसोसिएशन को उक्त 7.92 एकड़ अर्थात करीब 24 बीघा जमीन तीस वर्षो के लिए लीज पर देने पर देने की मुहर लगा दी गई। इसी आधार पर बीते 12 मार्च 2020 को पश्चिम बंगाल भूमि व भूमि सुधार विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी ने दार्जिलिंग के जिला अधिकारी को उक्त जमीन मेची मार्केट व्यवसायी वेलफेयर एसोसिएशन को दीर्घकालिक समझौता के तहत आवंटित करने की जानकारी दी। इसके बाद मेची मार्केट व्यवसायी वेलफेयर एसोसिएशन ने आस-पास की खाली जमीन को भी समेट लिया। करीब 40 बीघा जमीन पर 1350 दुकानें बसाने की योजना मेची मार्केट व्यवसाई वेलफेयर एसोसिएशन की है। औसतन एक दुकान के लिए जमीन की कीमत 15 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसका मतलब है करीब 200 करोड़ रुपये की उगाही का रोड मैप तैयार है।

7.92 एकड़ सरकारी भेस्ट जमीन को लीज पर देने के लिए भूमि व भूमि सुधार विभाग ने कुल 9 करोड़ 76 लाख 60 हजार 800 रुपया सलामी और 97 लाख 66 हजार 80 रुपया प्रति वर्ष किराया निर्धारित किया है। इसके अनुसार दुकानदारों को दुकान स्वयं बनाना होगा और मेची मार्केट व्यवसायी वेलफेयर एसोसिएशन को वार्षिक किराया भी चुकाना होगा। लेकिन उक्त सरकारी भेस्ट जमीन आरएस खतियान नंबर-1 में रिकार्डेड होने के साथ सभी प्लॉट नंबर लॉक है। अर्थात जमीन की जानकारी और मूल्य सरकारी निर्देशानुसार ही होगा।

इस संबंध में दार्जिलिंग जिले की रजिस्ट्रार टी टी भूटिया ने बताया कि सरकारी भेस्ट जमीन होने की वजह से गंडगोल और उत्तर रामधन की सभी प्लॉट लॉक है। जो सरकारी निर्देश के बाद ही खोला जाएगा। उसके बाद ही जमीन का रजिस्ट्रेशन और मूल्य निर्धारित करना संभव होगा। जमीन लीज पर दिए जाने की स्थिति में सलामी और वार्षिक किराये पर स्टाम्प ड्यूटी भी देनी होगी।

खोड़ीबाड़ी के बीएल एंड एलआरओ शुभ्रजीत मजूमदार ने बताया कि उक्त जमीन की जानकारी और मूल्य सीधे नवान्न से तय हुआ है। मेची मार्केट व्यवसायी वेलफेयर एसोसिएशन को उक्त जमीन लीज पर देने का निर्देश राज्य सचिवालय नवान्न से दिया गया है। निर्धारित राजस्व का कुछ हिस्सा एसोसिएशन ने जमा कराया है। पूरी राशि जमा कराने पर ही एसोसिएशन को जमीन लीज पर दी जाएगी।

-एस पोन्नाबलम,जिला अधिकारी,दार्जिलिंग

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