जागरण संवाददाता, गंगटोक : सिक्किम में सदियों से स्थायी तौर पर निवास करने वाले बिहारी समुदाय के लोगों को भी केंद्रीय आयकर छूट के दायरे में शामिल करना अति आवश्यक है।

यह बातें ओल्ड सेल्टर्ल्स ऑफ सिक्किम फ्राम बिहारी कम्युनिटी के संयोजक अनिल कुमार गुप्ता ने कहीं है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि सिक्किम में विशेष रूप में व्यापार एवं व्यवसाय आदि पेशे के रूप में काम करने वाले बिहारी समुदाय का वजूद ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के आधार पर है। जिसकी पुष्टि तथा प्रमाण कागजी रूप में है। इसी वजह से सिक्किम का भारत में विलय के दिन 26 अप्रैल 1975 को आधार वर्ष मानकर रेसिडेंशियल सर्टिफिकेट (आरसी) को राज्य सरकार जारी कर रही है। संगठन ने आरसी व्यवस्था को आगे भी जारी रखने की माग करता है। क्योंकि यही व्यवस्था न्यायोचित है। राज्य सरकार आरसी धारकों को केंद्रीय आयकर की छूट के दायरे में शामिल करने की माग करता है, ताकि राज्य के सिक्किम सबजेक्ट व सर्टिफिकेट धारकों की तरह ही आरसी धारकों को भी केंद्रीय आयकर के छूट के दायरे में शामिल किया जा सके। प्रेस वार्ता में संगठन के सलाहकर व सिक्किम बिहारी जागरण मंच के संस्थापक अध्यक्ष राम पूजन ने सिक्किम में 26 अप्रैल 1975 के पूर्व से निवास करने वाले बिहारी समुदायों के लोगों को अन्य समुदायों की तरह अधिकारों को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को व्यवहार में उतारने की प्रक्रिया जारी हो रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री पीएस गोले ने आरसी धारक बिहारी समुदायों को नगर क्षेत्रों में जमीन खरीदने, प्लैट पंजीकरण कराने, ट्रेड लाइसेंस जारी करने की घोषणा को लागू करने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की है। जिसका मैं स्वागत करते हुए आभार व्यक्त करता हूं। क्योंकि आरसी धारक बिहारी समुदायों को इस नीति निर्णय से न्याय मिलेगा। क्योंकि केंद्रीय आयकर से छूट, ट्रेड लाइसेंस, आरसी आदि बहुत पुरानी मागें हैं।

Posted By: Jagran

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