जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी : तृणमूल कांग्रेस समर्थित ट्रेड यूनियन आईएनटीटीयूसी अनुमोदित तृणमूल चा बागान श्रमिक यूनियन ने उन चाय बागान मालिकों के विरुद्ध आंदोलन का ऐलान किया है जो चाय बागान मजदूरों का हक मार रहे हैं। इसे लेकर आईएनटीटीयूसी के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष ऋतब्रत बंद्योपाध्याय ने मंगलवार शाम यहां राजकीय अतिथि निवास (सर्किट हाउस) में एक संवाददाता सम्मेलन किया। उन्होंने कहा कि उन सभी चाय बागान मालिकों के विरुद्ध आंदोलन कर कानूनी कार्रवाई करवाई जाएगी जिन्होंने मजदूरों के भविष्य निधि का अपना अंश लंबे अर्से से जमा नहीं कराया है। पीएफ व अन्य सुविधाएं नहीं दे रहे हैं। वे मालिकान बख्शे नहीं जाएंगे जो नियमानुसार अपने मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा का अपना दायित्व सही ढंग से निभा नहीं रहे हैं। केवल भ्रष्टाचार कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इस आंदोलन की कड़ी में आगामी 20 अगस्त को जलपाईगुड़ी के चालसा में, 21 अगस्त को अलीपुरद्वार के कालचीनी में, चार सितंबर को दार्जिलिंग के मिरिक में व छह सितंबर को सिलीगुड़ी महकमा के नक्सलबाड़ी में श्रमिक सम्मेलन किया जाएगा। उन सम्मेलनों में श्रमिकों के हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। उनकी बातों, समस्याओं को लिखित रूप में दर्ज किया जाएगा। फिर, उसी अनुरूप चाय बागान मालिकान व शासन-प्रशासन के समक्ष ये मुद्दे उठाए जाएंगे। मजदूरों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इसे लेकर हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। जोरदार आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने सभी चाय बागान मजदूरो से उपरोक्त सम्मेलनों में बढ़-चढ़ कर सम्मिलित होने एवं अपनी शिकायतें दर्ज कराने की अपील की है। इसे लेकर जगह-जगह जोर-शोर से प्रचार भी किया जा रहा है।

इस दिन उन्होंने, चाय बागानों व मजदूरों की समस्याओं के समाधान की दिशा में केंद्र सरकार की उपेक्षा भरी नीति को भी जम कर कोसा। कहा कि, केंद्र सरकार केवल झूठे वायदे ही की और कुछ नहीं। उसने वित्तीय वर्ष 2020-21 में ही कहा कि चाय बागानों के कायकाल्प के 1,000 करोड़ रुपये देने की बात कही थी पर एक फूटी कौड़ी भी नहीं दी। डंकंस के सात चाय बागानों के अधिग्रहण की बात भी कही लेकिन कुछ नहीं किया। अब तो केंद्र सरकार व केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के लोग उत्तर बंगाल के चाय बागानों में फटकते तक भी नहीं हैं। उत्तर बंगाल में भाजपा के विधायकों व सासदों और मंत्रियों को इसका जवाब देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पूरी तरह आम जनहित व मजदूर हित विरोधी सरकार है। नए लेबर कोड के जरिये वह श्रमिकों के दैनिक कार्य की अवधि आठ घंटे बढ़ा कर 12 घंटे की कवायद कर रही है। सारा का सारा अधिकार मालिकान को ही दे रही है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसके विरुद्ध आईएनटीटीयूसी जोरदार आंदोलन करेगा।

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