-वर्षो से उपेक्षा के कारण चिकित्सा सेवा बदहाल

- मामूली चोट व सरदर्द की दवा भी नदारद

- मेडिकल कॉलेज पास होने के कारण सरकार का ध्यान नहीं

-स्टोर में अधिकांश दवाओं की मियाद भी खत्म फोटो:

मोहन झा, सिलीगुड़ी : उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल से सटे होने की वजह से उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय परिसर स्थित हेल्थ सेंटर शुरू से ही उपेक्षित रहा है। उपेक्षा का आलम यह रहा किइस हेल्थ सेंटर को 14 वर्ष के बाद स्थाई मेडिकल ऑफिसर प्राप्त हुआ है। वहीं दूसरी तरफ विवि के विद्यार्थियों ने आवश्यक आपातकालीन उपचार व साधारण दवा तक नहीं मिलने का आरोप लगाया है। हालांकि विवि प्रबंधन ने आरोपों को खारिज करते हुए हेल्थ सेंटर की सेवाओं में सुधार का भरोसा दिया है।

उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय परिसर में जो हेल्थ सेंटर है,वह बाहर से दिखने में चकाचक है। लेकिन इसकी स्थिति बदहाल है। यहां ना डॉक्टर मिलते हैं और न ही दवाइयां उपलब्ध है। इस हेल्थ सेंटर को विवि के शिक्षार्थी, प्रबंधन अधिकारी, शिक्षक-शिक्षिकाओं व स्टाफ के इलाज के लिए बनाया गया था। पैथोलोजी जांच भी काफी कम खर्च में कराने का प्रावधान है। बल्कि दवाइयां तक मुफ्त में देने की व्यवस्था है। लेकिन फिलहाल यहां पैथोलोजी टेस्ट तो दूर सरदर्द की गोली भी नहीं मिलती है। उत्तरबंग विवि के इस हेल्थ सेंटर की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 14 वर्ष बाद इसे स्थाई मेडिकल ऑफिसर प्राप्त हुआ है। विवि के शिक्षाथिर्यो का आरोप है कि यह बस नाम का हेल्थ सेंटर है। यहां तो मामूली कटे-जले व सर दर्द तक की गोली नहीं मिलती है। स्वास्थ सेवा तो दूर की बात है। छोटी से छोटी स्वास्थ सेवा के लिए उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ता है। अधिकांश नए आए विद्यार्थियों को इस हेल्थ सेंटर की जानकारी तक नहीं होती है। सूत्रों की मानें तो इस हेल्थ सेंटर में लगी मशीनरी भी खराब हो रही है। स्टोर रूम में रखी दवाइयों की मियाद वर्षो पहले खत्म हो गई है।

वर्ष 2004 में यहां के मेडिकल ऑफिसर के रिटायर्ड होने के बाद से यह पद खाली था। अब 14 वर्ष के बाद इस हेल्थ सेंटर को स्थाई मेडिकल ऑफिसर मिला है। 12 वर्ष लंदन में बिताने के बाद डॉ. जकिया बानो ने मेडिकल ऑफिसर का कार्यभार संभाला है। विवि प्रबंधन से प्राप्त जानकारी के अनुसार मेडिकल ऑफिसर के अतिरिक्त इस हेल्थ सेंटर में चार विशेषज्ञ डॉक्टर, एक पैथालॉजिस्ट और एक फॉर्मासिस्ट हैं। उत्तर बंग विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. दिलीप सरकार ने बताया कि 14 वर्ष के बाद विवि के हेल्थ सेंटर को स्थाई आरएमओ मिला है। स्टॉक में उपलब्ध दवा से अधिकांश की मियाद खत्म हो चुकी है। नई दवाइयां मंगाने के साथ हेल्थ सेंटर की सेवा को बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि विवि के हेल्थ सेंटर में काफी सुधार की आवश्यकता है। वर्ष 2007 तक उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल उत्तरबंग विश्वविद्यालय के अधीन होने की वजह से हेल्थ सेंटर पर कोई खास ध्यान नहीं दिया गया।

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