कोलकाता, जागरण संवाददाता। ट्वीट पर मुख्यमंत्री पर निशाना साधने के बाद, राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल सरकार के जंग जैसी कोई स्थिति में वह नहीं हैं। उनका एकमात्र उद्देश्य राज्य में जनसेवा है।

हालांकि इसके तुरंत बाद वह यह कहना भी नहीं भूले कि राज्य में विश्वविद्यालयों को संचालन जैसा होना चाहिए, वैसा नहीं हो रहा है। राज्यपाल धनखड़ ने कहा कि मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि फिलहाल राज्य सरकार के साथ लड़ाई जैसी कोई स्थिति नहीं है। मैं यहां राज्य के लोगों की सेवा के लिए आया हूं। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के तौर पर मैंने जो देखा उनका जिक्र भर करने से यह अखबारों की हेडलाइन बन जाएंगी। लेकिन एक कुलाधिपति के रूप में मैंने देखा कि हमें जिस तरह से विश्वविद्यालयों को चलने देना चाहिए, वैसा नहीं हो रहा है। इन सबके बीच सबसे अहम सवाल यह निकल के सामने आ रहा है कि आखिरकार यहां बॉस कौन है, राज्य सरकार या कुलाधिपति?

उन्होंने कहा कि मैंने राज्य सरकार व कुलाधिपति, दोनों की दृष्टि से यह मुद्दा देखने की कोशिश की, मुझे पता चला कि संचालन में दोनों के ही सीमित जिम्मेदारी है। ऐसे में विश्वविद्यालयों के बेहतरीन संचालन में हम दोनों को एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए, ना कि खुद को बड़ा दिखाने के लिए प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए।

मौके पर उन्होंने बताया कि जल्द 49वीं राज्यपालों की बैठक होनेवाली है। उन्होंने कहा कि मैंने राज्य सरकार को पत्र लिख कर पूछा है कि अगर उन्हें इस बैठक में कोई मुद्दा उठाना है तो वह मुझे बता दें, वहां राज्य का पक्ष रखने में मुझे बेहद खुशी होगी।

राज्यपाल जगदीप धनखड़ व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी में एक और जंग की तैयारी दिख रही है। बुधवार को एक ट्वीट कर राज्यपाल ने कहा कि वह कॉलेज व विश्वविद्यालयों के शिक्षकों को दी गई मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस सलाह के निहितार्थ समझने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने ने शिक्षकों को कोई भी समस्या होने पर सीएम सीएम तक जाने की सलाह दी गई है और कहा गया है कि कोई और क्या कहता है, इसकी उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है।

अपने ट्वीट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को टैग करते हुए उन्होंने लिखा है कि एक राज्यपाल और एक कुलाधिपति के तौर पर मेरा कृत्य संविधान और युनिवर्सिटी एक्ट के अनुरूप है।

गौरतलब है कि मंगलवार को कालेज व विश्वविद्यालय शिक्षकों के एक आधिकारिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर कोई आपसे कुछ कहता है, तो इसके लिए आपको नाहक परेशान होने की जरूरत नहीं है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर राज्यपाल का नाम नहीं लिया लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि उनका इशारा राज्यपाल की ही तरफ था, जो विश्वविद्यालयों को मामले में फिलहाल अति सक्रिय हैं। वह बतौर कुलाधिपति विश्वविद्यालयों का लगातार दौरा कर रहे हैं। मौके पर सीएम ने शिक्षकों के सामने यह भी दोहराया कि उनकी सरकार भी केंद्र सरकार की तरह जनता द्वारा चुनी हुई सरकार है। उन्होंने कहा कि संविधान ने चयनित सरकारों को कुछ क्षमताएं दी हैं। केंद्र सरकार भी चयनित सरकार है। इसलिए आपको कोई भी समस्या हो आप सीधे हमसे कहें।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले सीएम ने एक विश्वविद्यालय के कुलपति की जमके क्लास लगाई थी। सूत्रों की मानें तो उन्होंने विश्वविद्यालय से जुड़ी कुछ समस्याओं से राज्य सरकार को अवगत कराने की बजाय कही और (राज्यपाल से) इस पर चर्चा की थी।

वैसे ममता सरकार के साथ राज्यपाल धनखड़ के तल्ख रिश्तों की शुरुआत ही एक विश्वविद्यालय के मुद्दे से हुई थी, जहां प्रदर्शनकारी छात्रों से घिरे केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को बचाने के लिए राज्यपाल खुद पहुंच गए थे। तब तृणमूल सरकार ने राज्यपाल के इस कृत्य को हैरान करनेवाला और दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया था। तब से शुरू हुई तल्खी गाहे-बगाहे सामने आ रही है। 

Posted By: Preeti jha

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