मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

कालिम्पोंग, जेएनएन। शहर शुक्रवार को सांसद व केंद्रीय मंत्री एसएस अहलूवालिया के खिलाफ पोस्टर से पट गया है। पोस्टर में सांसद के खिलाफ नारेबाजी की गई है, उन्हें अदालत से बड़ा कह ‘हाय-हाय, मुर्दाबाद, पहाड़ की शांति भंग करने वाला षड्यंत्रकारी’ कहा गया है।

दरअसल, सिलीगुड़ी में सांसद अहलूवालिया ने प्रेस में विमल गुट के पक्ष में बयान दिया था। इसके खिलाफ आक्रोशित गोरखा जन मुक्ति मोर्चा कालिम्पोंग जिला समिति के सदस्यों ने पोस्टरिंग की। मोर्चा का कहना है कि विमल गुरुंग की याचिका सर्वोच्च न्यायालय से खारिज हो चुका है। गुरुंग को लेकर बैठक की गोजमुमो निंदा करता है। पार्टी की जिला सचिव गायत्री मुखिया ने कहा कि सांसद का बयान निंदनीय है।

वह शांत पहाड़ को फिर से अशांत करने का षड्यंत्र रच रहे हैं। पहाड़ 105 दिनों के आंदोलन के समय अशांत था, लोग दु:खी थे पर सांसद का पता नहीं था। उस समय विनय तामांग, अनीत थापा, सचबीर सुब्बा आगेआए और शांति बहाल की। अब भड़काउ बयान देकर अहलूवालिया फिर पहाड़ को अशांत करने की कोशिश कर रहे हैं। विमल गुरुंग पहाड़ छोड़कर भाग गए हैं।

मुखिया ने भगोड़े नेता को फिर से पहाड़ में लाने को गलत कहा। विमल गुरुंग पहाड़ में स्वीकार्य नहीं। युवा प्रवक्ता अमीर बसनेत ने कहा कि सांसद एक साल देर से बोले। आंदोलन के समय उनका पता नहीं था। तब उन्होंने दार्जिलिंग के संबंध में एक शब्द नहीं बोला था। भाजपा झूठ की राजनीति कर रही है। चुनाव के वक्त गोरखाओं के हिमायती बन जाते हैं।

गोरखा का सपना मेरा सपना कहने वाले मोदी जी आज पीएम हैं। विमल गुरुंग व संसाद गोरखालैंड लेकर पहाड़ आते हैं तो स्वागत है। हवा मिठाई व चुनावी तिकड़म लेकर आते हैं तो बहिष्कार होगा। जब भी चुनाव आता है 11 जनजाति का भूत लेकर भाजपा आती है। 2016 में विधानसभा चुनाव के वक्त पाई कमीशन लेकर भाजपा आई थी। उसका अब तक अता पता नहीं है। भाजपा का चेहरा बेनकाब हो चुका है। विनय घीसिंग व बिधुर राई ने भी सांसद की निंदा की। 

Posted By: Preeti jha

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