नागराकाटा [संवादसूत्र]। सिलीगु़ड़ी, जलपाईगुड़ी व आसपास के जिलों में धान की फसल तैयार होते ही जंगली हाथियों का तांडव शुरू हो गया है। ताजा घटनाक्रम में जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा में करीब चालीस बीघा धान की फसल को बर्बाद किया है। इस समय झुंट में दर्जनों हाथी एक साथ चल रहे हैं। वन विभाग के अफसर भी लाचार हैं।
बताया गया कि गत गुरुवार की रात हाथियों का एक विशाल झुंड नागराकाटा के छाड़टुड़ू बस्ती के गेट लाइन स्थित धान के खेत में घुस गया और रातभर जमकर तांडव मचाया। हाथियों ने पूरे खेत को तहस-नहस कर दिया। पके धान को खाने के लिए में भूटान सीमा पर स्थित डायना जंगल से हाथी निकलकर नागराकाटा के कैरन व लुकसान चाय बागान में चले आते हैं और उत्पात मचाते हैं।
वन विभाग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 60 से 70 हाथियों का एक विशाल झुंड शाम होते ही भूटान सीमा पर स्थित डायना जंगल से निकल कर दो हिस्सों में बंट जा रहा है। एक झुंड डायना जंगल से ग्रासमोड़ चाय बागान के चार नंबर गेट होकर 31 सी राष्ट्रीय राजमार्ग व रेलवे पटरी पार कर लुकसान बागान से सटे गुमौनी भूटान में चला जा रहा है, वहीं दूसरा झुंड कैरन चाय बागान होकर नैनीताल भूटान में चला जा रहा है। पके धान खाने के लिए जा रहे हाथियों को रोकने पर वे भड़क जाते हैं और नागराकाटा के विभिन्न इलाकों के धान खेतों में तबाही मचाते हैं। इसके पहले बुधवार की रात भी कैरन के रास्ते भूटान जाने वाले हाथियों को रोकने पर हाथियों ने लुकसान के कालीखोला बस्ती, कैरन चाय बागान व चेंगमारी चाय बागान मिलाकर 20 बीघा धान की फसल को नष्ट कर दिया था।
प्रभावित किसानों की ओर से डायना रेंज ऑफिस में क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन किया गया है। दूसरी ओर, गुरुवार की रात भी हाथी झुंड ने छाड़टंडु बस्ती में 20 बीघा धान की फसल को बर्बाद कर दिया। किसानों द्वारा काट कर रखी गई धान की फसल को डकार गया। ग्राम पंचायत सदस्य सुरजीत शैव ने कहा कि प्रभावित किसानों को अगर वन विभाग से क्षतिपूर्ति नहीं मिली तो वे अपने बाल-बच्चे को लेकर मुश्किल में पड़ जाएंगे। वन विभाग के अनारारी वाइल्ड लाइफ की वार्डेन सीमा चौधरी ने कहा कि हाथियों की गतिविधि नियंत्रित करने के लिए वन कर्मियों की ओर से पूरी कोशिश की जा रही है। प्रभावित लोगों को सरकारी नियमों के तहत मुआवजा मिलेगा। 

Posted By: Rajesh Patel

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