सिलीगुड़ी, अशोक झा। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए पूर्वोत्तर के प्रवेशद्वार सिलीगुड़ी समेत उत्तर बंगाल में लॉकडाउन है। अधिकांश लोग घर से कार्य कर रहे हैं। वहीं जो लोग कार्यालय नहीं जाते थे उनका घर से बाहर निकलना बंद हो गया है। ऐसे में स्वास्थ्य को लेकर हर किसी की चिंता बढ़ गई है। एनर्जी खर्च के साथ तनाव भी बढ़ रहा है। इसका असर परिवार पर पड़ रहा है। ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

कोरोना को हराना है तो घर के अंदर परिवार के साथ खुशी से रहना होगा ऐसा क्यों ? इसकी जानकारी दैनिक जागरण से बातचीत में  दी  हैं उत्तर बंगाल की प्लास्टिक सर्जन विशेषज्ञ व स्माइल प्रॉजेक्ट की निदेशिका डॉ नीला भटाचार्य ने । जो कुछ इस प्रकार है।

इन दिनों महिलाओं में क्या बदलाव आ रहा हैं?

डॉ नीला भट्टाचार्य: महिला अपनी पूरी जिंदगी में तमाम बदलावों से गुजरती है। इन दिनों कोरोना को लेकर कुछ ज्यादा ही परेशान है। इन बदलावों के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार होते हैं, हार्मोन्स। आए इस असंतुलन का असर हमारी सेहत से लेकर बाल और त्वचा तक पर नजर आता है। मूड में बदलाव, रोशनी के लिए संवेदनशीलता, तैलीय त्वचा और बाल, कुछ खाने का मन नहीं करना, नींद न आना, चिंता, तनाव और चिड़चिड़ापन ये सब हार्मोनल बदलावों के संकेत हो सकते हैं। गर्भावस्था, पीरियड और मेनोपॉज के दौरान हार्मोन  का यह संतुलन ज्यादा बिगड़ता है।

लेकिन यह केवल एक विशेष उम्र तक सीमित नहीं रहा है। अब तो व्यस्त दिनचर्या और तनावभरी जीवनशैली के चलते यह समस्या कम उम्र में ही महिलाओं में खूब देखी जाती है। हार्मोन के इस असंतुलन को सामान्य करना मुश्किल नहीं है। खास बात यह है कि आप यह काम प्राकृतिक उपायों की मदद से भी कर सकती हैं। इसका फायदा यह है कि इस तरह से आपकी सेहत कई तरह के साइड इफेक्ट्स से भी बची रहती है।

बचाव के लिए क्या करना चाहिए? 

डॉ नीला भटाचार्य : 

परेशान करने वाले विचारों से दूर रहें। दिमाग को शांत रहें। गुस्सा या चिड़चिड़ाहट हो तो 10 से 1 तक उल्टी गिनती गिनें, दिमाग को कहीं और केंद्रित करे। डर लगे तो सोचें कि आपके नियंत्रण में क्या है?  पहले जब तनाव हुआ तो उसे कैसे कम किया था?  सकारात्मक रहने के उपाय सोचे। अकेला या दुखी महसूस करने पर परिजनों व मित्रों के संपर्क में रहें। उनसे बात करें, खुशनुमा बातों व घटनाओं को याद करें। नकारात्मक भावनाएं बनी रहें तो परिजनों व मित्रों से बात करे। बच्चों से बांटे जिम्मेदारियां, ऐसे बिताएं।

अपना शेड्यूल बनाएं और घर के दूसरे सदस्यों को मदद करें। नकारात्मक बातों से बचें, संगीत सुनें, खूब पढ़ें, टीवी पर अच्छी फिल्में देखें। पुराने शौक जैसे पेंटिंग, गार्डनिंग, म्यूजिक पर भी काम कर सकते हैं। शारीरिक सक्रियता बढ़ाएं, कसरत करें। घर के आसपास लोगों की मदद करें। बुजुर्गों की रोजमर्रा के कामों, खरीदारी व दवाएं जुटाने में मदद करें। बच्चों को घर के काम करना सिखाएं, जिम्मेदारियां बांटें।

इस समय किस प्रकार के पेय पदार्थों का उपयोग करना चाहिए?

डॉ नीला भटाचार्य : शराब, कैफीन और चीनी युक्त पेय पदार्थ हमारे शरीर में  संतुलन बिगाड़ सकते हैं, क्योंकि इनसे कॉर्टिसोल हार्मोन का उत्पादन बढ़ता है, जिसका असर अंडाशयों की कार्य प्रणाली पर पड़ता है। इसका प्रयोग ना करें। दिनभर कम से कम 3 लीटर गरम पानी जरूर पीए।

अगर आपको प्यास लगे, तो सादा पानी या नारियल पानी पिएं। अगर आप एनर्जी चाहती हैं तो ग्रीन टी पिएं। इसमें कैफीन की सही मात्रा और एमिनो एसिड एल-थिएनिन होता है, जो दिमाग की कार्यप्रणाली को चुस्त बनाता है।

परिवार को तनाव से  कैसे दूर रखें ?

डॉ नीला भटाचार्य: तनाव का असर हमारी जिंदगी पर चौतरफा पड़ता है। अकसर हम तनाव में अपने स्वास्थ्य की अनदेखी करते हैं, प्रोसेस्ड खाद्य पदाथों का सेवन करने लगते हैं और नींद पूरी नहीं करते। तनाव से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन ज्यादा बनता है, जिससे थकान होती है। ऐसा होने पर शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता  कम हो जाती है। गुनगुने पानी से नहाएं, सैर करें और योगासन करें।

एंग्जायटी की इस दिनों काफी शिकायतें मिल रही है कारण ओर निवारण क्या है?

डॉ नीला भटाचार्य:  एंग्जायटी यानी चिंता किसी को भी हो सकती है इसलिए इसे समझना जरूरी है। इसमें विचार जितनी तेजी से आते हैं उतनी ही तेजी से चले भी जाते हैं।सांसों की गति तेज होने लगती है, हाथ—पैरों में पसीना आता है और दिल तेजी से धड़कने लगता है। ऐसा अक्सर किसी एग्जाम के समय हो सकता है। नींद पूरी ना होने के कारण भी आपको हो सकती है। अगर सरल भाषा में समझा जाए तो एंग्जायटी उन विचारों से होती है जो निगेटिव होते हैं। एंग्जायटी के शिकार व्यक्ति अक्सर या तो बहुत ज्यादा बोलते है या बहुत ही शांत रहते हैं।

इसके  लक्षण  को पहचानना जरूरी है

डॉ नीला भटाचार्य ने कहा कि दिल की धड़कनों का तेज होना या घबराहट महसूस होना तनाव होने के सबसे बड़े लक्षण हैं। जिसे अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैं। सिर दर्द होना होना आज के समय आम बात है, जिसके कई कारण हो सकते हैं, उनमें से एक तनाव भी है। जब हम दिमाग पर बहुत ज्यादा जोर डालने लगते हैं तो सिर में दर्द होना शुरू हो जाता है।  सांस फूलना भी एक गंभीर समस्या है, यह भी अधिक तनाव होने लक्षणों में से एक है। जब हम अधिक स्ट्रेस लेते हैं तो घबराहट के कारण पसीना आने लगता है।  बेचैनी को अक्सर लोग हार्ट प्रॉब्लम से जोड़ते हैं, लेकिन यह भी तनाव होने के कारण होती है। मांसपेशियों में तनाव होना यानी खिचाव महसूस होना। हाथ-पैरों का ठंडा पड़ जाना। कमजोरी और सुस्ती महसूस होना। ज्यादातर शांत रहना और किसी से बात न करना। चक्कर आना भी इसका एक लक्षण है। नींद न आना, तनाव के दौरान यह भी एक समस्या होती है।

इससे मुक्ति के लिए जरूरी कुछ कदम

 बकौल डॉ भटाचार्य : सबसे पहले तो आप अपने दिनचर्या में कुछ ऐसे कामों को भी जरूर शामिल करें। जिन्हें करने पर आपको खुशी मिलती है। इससे आपका तनाव काफी हद तक कम होगा।

अपनी नींद से समझौता न करें। यदि आप को तनाव के कारण नींद नहीं आ रही तो म्यूजिक सुनें। कई बार म्यूजिक सुनते-सुनते भी नींद आ जाती है।  वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं, तो बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें। इससे आपको थकावट नहीं होगी। कोशिश करें कि इस दौरान सिर्फ काम के बारे में सोझें। हैल्दी फूड खाएं, आपके खान-पान का भी आपके शारीरिक और मानसिक सेहत पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। जंक फूड के सेवन से बचें । समय निकाल कर  घर पर ही कुछ स्पेशल बना सकते है। घर मे पति पत्नी और बच्चों के साथ मिलकर काम करे