-एक और मरीज का मैक एलाइजा टेस्ट पॉजिटिव

-बुखार लगते ही डॉक्टर के पास भागते हैं लोग

-जिला अस्पताल के ओपीडी में रोगियों की लंबी कतार

-दो दिनों में तीस भर्ती,बेड की भारी कमी

जागरण संवाददाता,सिलीगुड़ी: इस साल कथित रूप से डेंगू के कारण दो मरीजों की मौत से पूरे सिलीगुड़ी नगर निगम इलाके में दहशत का आलम है। जरा बुखार होते ही लोग घबराकर या तो डॉक्टर के पास इलाज कराने जा रहे हैं या सीधे अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में बुखार के लक्षण लेकर इलाज कराने आए रोगियों की भीड़ लगी हुई है। एक अनुमान के मुताबिक हर दिन ही बुखार के पचास से साठ मरीज यहां ओपीडी में इलाज के लिए आ रहे हैं। जबकि पिछले दो दिनों में इस अस्पताल 30 रोगियों की भर्ती की गई है। अब तो यहां बेड भी उपलब्ध नहीं है। जमीन पर लिटा कर रोगियों की चिकित्सा करनी पड़ रही है। अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहां एनएस 1 पॉजिटिव एक रोगी को मैके एलाइजा टेस्ट भी पॉजिटिव आया है। मरीज का नाम विनोद साहा है। वह शहर के 15 नंबर वार्ड का रहने वाला है। डेंगू की पुष्टि मैक एलाइजा टेस्ट से ही की जा सकती है। यहा उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों में सिलीगुड़ी नगर निगम इलाके में डेंगू के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। खासकर वार्ड नंबर 23 में डेंगू के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। एक अनुमान के मुताबिक सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के साथ-साथ उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एवं विभिन्न नर्सिंग होम में एनएस1 पॉजिटिव करीब 40 रोगियों की चिकित्सा चल रही है। कल ही डेंगू के लक्षण लेकर सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के एक चिकित्सक की मौत हो गई थी। जिला अस्पताल की डॉक्टर सहित जिन दो महिलाओं की मौत हुई है उनके रक्त के नमूने को जाच के लिए कोलकाता स्वास्थ्य विभाग भेजा गया है। हांलाकि अभी कोई नहीं कह रहा है कि डॉक्टर की मौत भी डेंगू की वजह से ही हुई है। टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद ही इस बारे में कुछ कहा सकता है।

वेस्ट बंगाल वोलेंटरी ब्लड डोनर फोरम के सोमनाथ चटर्जी का कहना है कि डेंगू से निपटने के लिए राजनीति छोड़कर सभी को एक होकर काम करना होगा। अभी तक राजनीति की जा रही है। एक दूसरे को दोषी ठहराने का काम चल रहा है। सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में बुखार पीड़ित रोगियों का तांता लगा हुआ है। लोग डरे हुए हैं। डेंगू का असर अभी और कुछ दिनों तक रहेगा। ठंड गिरने के बाद ही डेंगू से राहत मिलने की संभावना है। इधर,सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर अशोक भट्टाचार्य परिस्थिति काबू में रहने का दावा कर रहे हैं। लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि अभी भी शहर में कई स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नियमित रूप से साफ सफाई नहीं की जा रही है। जिन वाडरें में डेंगू का प्रकोप देखा जा रहा है,वहीं साफ-सफाई के साथ मच्छर नाशक तेल एवं ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया जा रहा है। जबकि शहर के विभिन्न वाडरें में चौक चौराहों पर गंदगी का अंबार सहज ही देखा जा सकता है। हमारे एक पाठक अशोक अग्रवाल ने सिलीगुड़ी के कंचनजंगा स्टेडियम के एक नंबर गेट के सामने कचरे के अंबार की तस्वीर भेजी है।

दार्जिलिंग जिले के सीएमओएच प्रलय आचार्य ने कहा है कि सिलीगुड़ी नगर निगम के सभी वाडरें को 25-25 हजार रुपये डेंगू से निपटने के लिए दिए गए हैं। विभिन्न सरकारी अस्पतालों में बुखार पीड़ित रोगियों की चिकित्सा की जा रही है। परिस्थिति नियंत्रण में है।

यहां यह भी बता दें कि बृहस्पतिवार को सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के एक डॉक्टर की मौत हो गई। उन्हें भी बुखार तथा डेंगू के लक्षण को लेकर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी चिकित्सा एक निजी नर्सिग होम में चल रही थी। मृतका का नाम डॉ स्वाती दासगुप्ता है। डेंगू के कारण सीमा सेन नामक एक अन्य रोगी की मौत भी दुर्गा पूजा के दौरान हो गई थी।

Posted By: Jagran

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