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दार्जिलिंग में गोरखा मुद्दे पर केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण बैठक, तराई-डुवार्स के 396 मौजा पर भी चर्चा

Published: Thu, 08 Oct 2026 08:59 PM (IST)Updated: Thu, 08 Oct 2026 09:29 PM (IST)

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने दार्जिलिंग में केंद्र सरकार के वार्ताकार और गृह मंत्रालय की टीम के साथ अहम बैठक की।

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने केंद्र सरकार के साथ दार्जिलिंग में बैठक की (फाइल फोटो)

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने केंद्र सरकार के साथ दार्जिलिंग में बैठक की (फाइल फोटो)

HighLights

  1. गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने केंद्र सरकार के साथ दार्जिलिंग में बैठक की

  2. तराई-डुवार्स के 396 मौजा और 11 जातियों के दर्जे पर बात हुई

  3. गोरखा मुद्दे के राजनीतिक और संवैधानिक समाधान पर जोर दिया गया

जागरण संवाददाता, दार्जिलिंग। बंगाल के दार्जिलिंग पहाड़ में गोरखा मुद्दे के राजनीतिक समाधान की दिशा में गुरुवार को हुई अहम बैठक में तराई और डुवार्स के 396 मौजा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा।

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (गोजमुमो) के अध्यक्ष विमल गुरुंग के नेतृत्व में पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने भारत सरकार के नियुक्त वार्ताकार पंकज कुमार सिंह तथा केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम के साथ दार्जिलिंग में बैठक की। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव के अलावा बंगाल सरकार के गृह सचिव भी मौजूद रहे।

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा की केंद्र के साथ बैठक 

बैठक के दौरान गोजमुमो प्रतिनिधिमंडल ने तराई और डुवार्स से जुड़े विभिन्न जनमुद्दों के साथ 396 मौजा, 11 जाति को जनजाति का दर्जा देने तथा सीमा से संबंधित संवैधानिक समाधान के मुद्दे को भी सरकार के समक्ष रखा।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इन क्षेत्रों के लोगों की लंबे समय से लंबित समस्याओं को केवल स्थानीय प्रशासनिक या क्षेत्रीय विषय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इनके सामाजिक, राजनीतिक और संवैधानिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है।

बैठक के बाद गोजमुमो ने इसे महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि पार्टी को पहाड़, तराई और डुवार्स के लोगों की आकांक्षाओं एवं लंबे समय से लंबित समस्याओं को केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी तरीके से रखने का अवसर मिला।

पार्टी ने स्पष्ट किया कि जनसरोकार से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकार के साथ संवाद की प्रक्रिया आगे भी जारी रखी जाएगी। गोजमुमो ने उम्मीद जताई कि लगातार बातचीत के माध्यम से संबंधित क्षेत्रों की समस्याओं के स्थायी और स्वीकार्य समाधान की दिशा में ठोस प्रगति होगी।

लंबे समय से हो रही गोरखालैंड की मांग

गौरतलब है कि दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में अलग गोरखालैंड राज्य के गठन की मांग लंबे समय से चली आ रही है। अब इस मुद्दे के राजनीतिक समाधान की दिशा में केंद्र और संबंधित पक्षों के बीच संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही जा रही है। इसी क्रम में हुई इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गोजमुमो नेताओं ने बैठक में पहाड़, तराई और डुवार्स को अलग-अलग देखने के बजाय तीनों क्षेत्रों को समग्र दृष्टिकोण से देखने पर जोर दिया। पार्टी का कहना है कि इन क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों का दीर्घकालिक समाधान व्यापक राजनीतिक संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से ही निकाला जा सकता है।