-होटलों में भी 75 प्रतिशत कमरे खाली

-चाइना बाजार में शटर गिरने के कगार पर

-चावल और दाल की बिक्री में अचानक उछाल

-घरेलू पर्यटकों पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग

-टूर ऑपरेटर स्वयं जारी करेंगे एडवाइजरी जागरण संवाददाता,सिलीगुड़ी:देश में कोरोना वायरस के मामले जितनी तेजी से बढ़ रहे हैं,उसे देखते हुए अब सिलीगुड़ी शहर में भी डर जैसे हालात बनने लगे हैं। हालाकि राज्य में अब तक कोरोना का एक भी मामला सामने नहीं आया है,फिर भी लोग काफी सावधानी बरत रहे हैं। क्योंकि सिलीगुड़ी अत्यंत संवेदनशील शहर है। नेपाल,भूटान,बाग्लादेश के साथ ही चीन तक की सीमा यहां के काफी करीब है। बिहार एवं सिक्किम की सीमाएं तो नजदीक है ही। सबसे बड़ी बात यह है कि सिलीगुड़ी सहित पूरा दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र देश के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। हर साल ही यहा भारी संख्या में पर्यटक आते हैं। इस साल भी काफी पर्यटक यहां आए थे। जिसमें काफी संख्या मे विदेशी पर्यटक भी थे जो पर्यटन कर लौट गए हैं। इसी कारण से इस इलाके में कोरोना वायरस का खतरा भी ज्यादा है। इसको देखते हुए शहर में जहा मास्क पहनने का सिलसिला शुरू हो गया है वहीं बाजार एवं मॉल सुनसान पड़े हुए हैं। शहर के अधिकाश मॉलों में लोग जाने से कतरा रहे हैं। कल रविवार के दिन मॉलों में भीड़भाड़ नहीं के बराबर रही। इसके अलावा शहर के विभिन्न बाजारों में दुकानें तो खुल रही है लेकिन ग्राहक नहीं नजर आ रहे हैं। खासकर हागकाग मार्केट,विधान मार्केट,सेठ श्रीलाल मार्केट, महावीर स्थान,गोल्डेन प्लाजा,इंटरनेशल मार्केट आदि का हालत काफी खराब है।

इस बीच कोरोना के डर से लोग अपने-अपने घरों में खाने-पीने की सामग्री भी जमा करने में लग गए हैं। इस बात का पता इसी बात से चलता है कि पिछले 2 से 3 दिनों के अंदर खासकर चावल और दाल की बिक्री में काफी बढ़ोत्तरी हो गई है। उत्तर बंगाल के सबसे प्रमुख गल्ला मंडी में शामिल सिलीगुड़ी के खालपाड़ा दो तीन दिनों की बिक्री से तो यही अंदाजा लग रहा है। मिली जानकारी के अनुसार इस गल्ला मंडी से आमतौर पर मार्च के महीने में खाद्य पदाथरें की बिक्री कम होती है। क्योंकि मार्च का महीना ईयर एंडिंग का होता ही है। साथ ही रामनवमी की पूजा वगैरह में कारोबारी व्यस्त हो जाते हैं। स्थानीय व्यवसायियों से मिली जानकारी के अनुसार मार्च महीने में प्रतिदिन 200 से ढाई सौ छोटी-बड़ी गाड़िया इस मंडी से माल लेकर रवाना होती है। लेकिन पिछले दो से तीन दिनों में इसकी संख्या बढ़ गई है। 300 से साढ़े तीन सौ गाड़िया रवाना हुई है। खासकर दार्जिलिंग पहाड़ से काफी लोग खाद्य सामग्री खरीदने इस गल्ला मंडी में आ रहे हैं। लोगों में डर का माहौल है। आने वाले दिनों में स्थिति बिगड़ सकती है। इसी कारण लोग खाने-पीने की सामग्री जमा करने में लग गए हैं। सिलीगुड़ी मचर्ेंट एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष कमल गोयल ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि पिछले 2 से 3 दिनों में खासकर चावल और दाल की बिक्री बढ़ी है। हो सकता है कि लोग डर से खाने-पीने का स्टॉक अपने घर में जमा करा रहे हों। इधर,पर्यटन कारोबार भी फिलहाल खत्म होने के कगार पर है। सिलीगुड़ी के साथ-साथ दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के अधिकाश होटलों में सत्तर से 75 प्रतिशत कमरे खाली पड़े हैं। पर्यटक पिछले साल के मुकाबले वर्तमान में 25 से 30 प्रतिशत तक ही हैं। उनको भी यहा से वापस भेजने की तैयारी की जा रही है। इस बीच सिक्किम सरकार ने घरेलू पर्यटकों के आने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। इससे पर्यटन कारोबार पूरी तरह से ठप हो जाएगा। हांलाकि टूर ऑपरेटर भी परिस्थियों को देखते हुए पर्यटकों का आगमन बंद करने के पक्ष में हैं। अब तो उन्हीं की ओर से घरेलू पर्यटकों के आने पर प्रतिबंध लगाने की माग की जा रही है। इस्टर्न हिमालया ट्रैवल एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन के महासचिव संदीपन घोष का कहना है कि सिक्किम सरकार ने घरेलू पर्यटकों के आगमन पर प्रतिबंध लगा दिया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने हालाकि ऐसी कोई घोषणा नहीं की है लेकिन वह भी चाहते हैं कि कोरोना वायरस के डर को देखते हुए घरेलू पर्यटकों के आने पर भी प्रतिबंध लगे। उनके संगठन की ओर से भी एक एडवाइजरी जारी की जा रही है। कोलकाता, दिल्ली,मुंबई तथा देश के तमाम बड़े शहरों में जो टूर ऑपरेटर यहां की बुकिंग करते हैं,उनको बुकिंग बंद करने के लिए कहा जाएगा। संदीपन घोष ने यह भी कहा कि सिक्किम सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद जो घरेलू पर्यटक इलाके में रह गए हैं उनको वापस भेजने की कोशिश की जा रही है। ऐसे बहुत अधिक पर्यटक इस इलाके में नहीं हैं। जो बचे हैं उन्हें वापस भेजने की तैयारी की जा रही है। पहले स्वास्थ्य ठीक होना जरूरी है। आप ठीक रहेंगे तो कभी भी घूमने निकल पाएंगे। अर्थव्यवस्था की टूटी कमर

इस बीच कोरोना वायरस ने सिलीगुड़ी शहर के अर्थव्यवस्था की कमर तोड़नी शुरू कर दी है। बाजार में बिक्री तो कम है ही,ऐसे बाजार जो सिर्फ चीनी सामानों पर ही चलते थे वहा की हालत तो काफी खराब है। विधान मार्केट के अलावा हागकाग मार्केट,गोल्डन प्लाज, सिलिगुड़ी जंक्शन का चाइना बाजार की दुकानों में शटर गिरने की नौबत है। दुकानदारों का कहना है कि जब से चीन में कोरोना वायरस ने दस्तक दी थी, तभी से काम बंद है। क्योंकि चीनी माल की आवक नहीं हो रही है। अब तो ग्राहक भी आने बंद हो गए हैं। चीनी माल नहीं आने के कारण भारत में बने ही कॉस्मेटिक तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अपनी दुकान में बेच रहे थे। लेकिन जब ग्राहक ही नहीं आएंगे तो क्या करेंगे।

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पर्यटन कारोबार को तो नुकसान है,लेकिन लोगों की सेहत का ख्याल रखना भी जरूरी है। अभी इस क्षेत्र में पर्यटन नहीं आएं तो अच्छा। विदेशी पर्यटकों के साथ घरेलू पर्यटकों पर भी प्रतिबंध लगना चाहिए।

संदीपन घोष,महासचिव,एतवा पिछले दो तीन दिनों से चावल और दाल की बिक्री बढ़ी है। कोरोना के कारण लोगों में डर का माहौल है। इसी कारण से शायद लोग खाने-पीने की सामग्री जमा कर रहे हैं। सावधानी तो बेहद जरूरी है।

कमल गोयल,कोषाध्यक्ष,सिलीगुड़ी मर्चेट एसोसिएशन ---------------------

-घरेलू पर्यटकों में कमी-70 प्रतिशत

-विदेशी पर्यटक-00

-चीनी सामानों की बिक्री में कमी-100 प्रतिशत

-होटलों की बुकिंग में कमी-70 प्रतिशत

Posted By: Jagran

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