सिलीगुड़ी, जागरण संवाददाता। पिछले 3 साल से भी अधिक समय से भूमिगत रहने के बाद सार्वजनिक जीवन में लौटने वाले को गोजमुमो सुप्रीमो बिमल गुरुंग दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र से ज्यादा तराई में सक्रिय हो गए हैं। वह पिछले 4 दिनों से सिलीगुड़ी में कैंप लगाए हुए हैं और यहीं से गोरखा बहुल इलाकों में ताबड़तोड़ रैली कर रहे हैं।सबसे बड़ी बात यह है कि अपनी रैलियों में वह अपनी रैलियों में मुख्य रूप से कभी सहयोगी रही भाजपा पर निशाना साध रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार बिमल गुरुंग पिछले 3 दिनों में सिलीगुड़ी के निकट सालूगाड़ा, खोड़ीबड़ी के बाद अब मिलन मोड इलाके में रैली कर रहे हैं। मंगलवार को शाम में मिलन मोड में रैली है। इस रैली की सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई है। इस रैली में ना केवल देवीडंगा और मिलन मोड इलाके के लोग बल्कि सिलीगुड़ी नगर निगम के अधीन विभिन्न वार्डों में रह रहे गोरखा जाति के लोग भी शामिल होने के लिए जा रहे हैं। गुरुंग बस्ती इलाके से कई गाड़ियां अभी ही मिलन मोड़ के लिए रवाना हो गई है।

माना जा रहा है कि आज की रैली में भी बिमल गुरुंग मुख्य रूप से भाजपा पर ही निशाना साधेंगे। रैली स्थल पर अभी से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। काफी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई है। यहां बता दें कि गोरखालैंड आंदोलन के दौरान विमल गुरुंग पर 100 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए थे। उसके बाद से वह फरार चल रहे थे। कुछ महीने पहले वह कोलकाता लौटे और उसके बाद सक्रिय राजनीति में आ गए हैं। वह इस बार आने वाले विधानसभा चुनाव में तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा है कि उनका मुख्य मकसद भाजपा से बदला लेना और ममता बनर्जी को एक बार फिर से राज्य में मुख्यमंत्री बनाना है।

बिमल ने बताया है कि भाजपा ने उनको धोखा देने का काम किया है। गोरखालैंड के मुद्दे पर वह भाजपा का समर्थन कर रहे थे। लेकिन भाजपा ने गोरखालैंड की दिशा में कोई पहल नहीं की। यहां तक की पहाड़ के 11 जाति को जनजाति का दर्जा देने की दिशा में भी कोई कदम नहीं उठाया गया। वह अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। उनका मुख्य मकसद आने वाले चुनाव में भाजपा को सबक सिखाना है। इसी को ध्यान में रखते हुए वह गोरखा बहुल इलाके में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। विमल ने आगे कहा कि आने वाले दिनों में वह तराई के साथ-साथ डूअर्स में भी तृणमूल कांग्रेस के समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में दिखाकर बिमल गुरुंग कभी अपने ही सहयोगी रहे और अब अलग गुट के नेता विनय तामांग के साथ कोई टकराव नहीं चाहते। इसलिए उन्होंने पहाड़ से ज्यादा तराई और डूअर्स में अपनी सक्रियता दिखाई है। उनको लगता है कि पहाड़ पर अधिक रैलियां नहीं कर भी वह अपनी राजनीतिक जमीन ऐसे भी बचा सकते हैं। इसी कारण से वह पहाड़ से ज्यादा तराई में सक्रिय हैं।

Edited By: Preeti jha