गंगटोक, जागरण संवाददाता। भारतीय टीम के पूर्व स्टार फुटबालर तथा हाल तक तृणमूल कांगे्स के सक्रिय सदस्य रहे बाइचुंग भूटिया के तृकां से दामन छोड़ने के बाद सियासी कयासों का दौर शुरू हो चुका है। उनके भावी सियासी कदम को लेकर तमाम चर्चा परिचर्चा का दौर चरम पर है। हालांकि उनके सचिव और करीबियों की मानी जाए तो फुटबाल का सितारा अब सिक्किम की सक्रिय राजनीति के मैदान में उतर सकते हैं।

सनद रहे कि भूटिया ने ट्विटर हैंडल के जरिए टीएमसी छोड़ने की जानकारी अपने समर्थकों से साझा की थी। इस विषय पर बाइचुंग से संपर्क करने का प्रयास किया गया किंतु उनसे संपर्क नहीं हो पाया। प्राप्त जानकारी के अनुसार वो वर्तमान में थाइलैंड में हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के हवाले से किसी भी पार्टी में शामिल होने संबंधी अटकलों को सिरे से खारिज किया है।

बाइचुंग के सचिव अर्जुन राई ने विशेष बातचीत में पुष्टि करते हुए कहा कि भूटिया ने तृकां की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। राई ने उनके अगले राजनीतिक फैसले की जानकारी न होने की बात कही। राई ने बताया कि भाजपा समेत कई अन्य क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों ने बाइचुंग से संपर्क किया है। हालांकि भूटिया की ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया है। राई ने इतना जरूर बताया कि भूटिया जल्द ही अपने राजनीतिक इरादे जाहिर कर सकते हैं। भूटिया के सचिव ने भविष्य में भूटिया के उनके गृह राज्य सिक्किम में राजनीतिक तौर पर सक्रिय होने की जानकारी दी। सूबे की सियासत में भूटिया सत्ताधारी दल सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को चुनौती देते नजर आ सकते हैं। जिसके लिए क्षेत्रीय दल बनाने से लेकर किसी अन्य दल में शामिल होने की संभावना अर्जुन राई ने व्यक्त की।

वहीं भूटिया के तृणमूल से नाता तोड़ने के बाद दिल्ली से भी राजनीतिक प्रतिक्रिया आने में देर नहीं लगी। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजु ने तृकां छोड़ने के भूटिया के निर्णय का स्वागत करते हुए सिक्किम की राजनीति में बाइचुंग के सक्रिय होने पर पूरा सहयोग देने की बात लिखी।

वहीं दूसरी ओर भाजपा की सिक्किम इकाई ने भूटिया के कदम का स्वागत करते हुए भूटिया के अब तक गलत पार्टी में होने की बात कही। राज्य के मुख्य विपक्षी दल सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा ने भी महान फुटबालर के निर्णय का स्वागत किया है।

वहीं पूरे मामले पर राज्य के सत्ताधारी दल एसडीएफ ने पूरे सियासी हालात पर कोई चुप्पी साध रखी है। बताते चलें कि भूटिया मुख्य रूप से एसडीएफ के विरोध में नजर आए हैं। ऐसे में भूटिया का एसडीएफ में न जाना तो तय है। उनके अगले सियासी कदम को लेकर सस्पेंस बरकरार है। 

Posted By: Preeti jha

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस