मालबाजार/ जलपाईगुड़ी, जागरण टीम। मां सरस्वती, विश्वकर्मा और भगवान जगन्नाथ के बाद इस बार अंकित दत्त नेे मां दुर्गा प्रतिमा बनााई है। नन्हें अंकित ने 10 इंच की दुर्गा प्रतिमा को बेहतरीन कला के माध्यम से तैयार किया है। चालसा के परिमल मित्र नगर में अंकित द्वारा बनाए गए दुर्गा प्रतिमा की खूब चर्चा है।  वह चौथी कक्षा का छात्र है। अंकित ने महालया के दिन मूर्ति के नेत्रों को बनाया। इससे पहले अंकित भगवान जगन्नाथ और विश्वकर्मा की प्रतिमा बना चुके हैं।

 दुर्गा की प्रतिमा मिट्टी, पुआल, धागे, लकड़ी आदि से बनाई

खास बात यह है कि उन्होंने कभी किसी से प्रतिमा बनाने की कला नहीं सीखी। मां ममता दत्त ने बताया कि पांच साल की उम्र से ही अंकित को प्रतिमा बनाने में दिलचस्पी है। कई बार बाधा देने के बावजूद वह नहीं रुकता है। प्रतिमा बनाने के अलावा वह विभिन्न प्रकार के कला कार्यों को भी जानता है। वह बीते दो महीने से दुर्गा की प्रतिमा बना रहा था। प्रतिमा का आभूषण भी वह खुद ही बनाता है। पूजा के लिए वह खुद पंडाल भी बनाता है। अंकित स्वयं पूजा भी करता है। उनकी छोटी सी प्रतिमा को देखने के लिए कई लोग घर पहुंच रहे हैं। अंकित का कहना है कि दुर्गा की प्रतिमा मिट्टी, पुआल, धागे, लकड़ी समेत कई चीजों की मदद से प्रतिमा बनाई गई है। वह अपने हाथों से विभिन्न प्रकार की प्रतिमा बनाना पसंद करता है। इसमें माता-पिता समेत अन्य लोग उनका पूरा सहयोग करते हैं।

जलपाईगुड़ी में मिनी दुर्गा प्रतिमा बना रहे देवाशीष, दूसरे राज्‍यों में भी डिमांड 

घर में पूजा के बाद देवी प्रतिमा का विसर्जन करने की परंपरा है। इससे जलपाईगुड़ी के देबाशीष काफी उदास हो जाते थे। तभी देवाशीष झा को मिनी दुर्गा प्रतिमा बनाने का आइडिया आया। बड़ी दुर्गा, थीम दुर्गा तो बहुतों ने देखी है लेकिन 12 इंच की दुर्गा को बहुत कम लोगों ने देखा है। अब तो जलपाईगुड़ी की मिनी दुर्गा की दूससे  राज्यों से भी खूब डिमांड है। 
 मिनी दुर्गा प्रतिमा दिखाते हुए देबाशीष झा। जागरण फोटो।
जलपाईगुड़ी सदर ब्लॉक के राखलदेवी गांव के देवाशीष झा पेशे से पुजारी हैं। वे छोटी दुर्गा प्रतिमा बनाने के सिद्धहस्‍त कलाकार हैं। वह मिनी दुर्गा शिल्पकार हैं। लंबे समय से वह इस मिनी दुर्गा प्रतिमा बनाते आ रहे हैं।  देवाशीष द्वारा बनाई गई मिनी दुर्गा प्रतिमा को खरीदने लोग दूसरे राज्‍यों से भी आते हैं। मिनी दुर्गा प्रतिमा असम, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात सहित विभिन्न राज्यों में भेजी जाती थी।  मिनी दुर्गा प्रतिमा पूजा के बाद भी घर में रखी जाती है। छोटे आकार के कारण इस मिनी दुर्गा को आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है।
जैसे बड़ी दुर्गा बनाई जाती है, वैसे ही देवाशीष मिनी दुर्गा को पुआल और मिट्टी से बनाते हैं। देबाशीष झा ने कहा कि सामग्री के दाम दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन प्रतिमा की कीमत नहीं मिल रही है। इस मिनी दुर्गा को बनाने में काफी मेहनत और खर्च आता है। गहने बाहर से खरीदने के लिए उपलब्ध नहीं हैं इसलिए दुर्गा सहित लक्ष्‍मी, सरस्‍वती, कार्तिक और गणेश के आभूषण अपने हाथों से बनाने पड़ते हैं। देबाशीष झा की पत्नी बेबी झा प्रतिमा का आभूषण बनाती हैं। इस मूर्ति की बहुत मांग है। देबाशीष झा ने कहा, हमारे घर में दुर्गा पूजा की जाती थी। लेकिन विसर्जन के बाद उन्हें बुरा लगता है। तभी से उन्होंने मिनी प्रतिमा बनाने की सोची, जिसे बाद में भी घर पर रखा जा सके। देबाशीष झा ने इस बार भी छह मूर्तियां बनाई ।

Edited By: Sumita Jaiswal

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