यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 13, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
उत्तर बंगाल में हिंदी की दिशा-दशा में हो रहा सुधार : डॉ मनीषा झा
फोटो-राजेश-छह हिंदी दिवस पर विशेष ------ -स्कूलों में नहीं, बल्कि कॉलेजों में भी है हिंदी मे

फोटो-राजेश-छह
हिंदी दिवस पर विशेष
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-स्कूलों में नहीं, बल्कि कॉलेजों में भी है हिंदी में पठन-पाठन की व्यवस्था
-खुल रहे हिंदी कॉलेज और विद्यालय
शिवानंद पांडेय, सिलीगुड़ी : उत्तर बंगाल राज्य का ऐसा क्षेत्र है जहां देश के विभिन्न राज्यों के लोग रहते हैं। सबको आपस में जोड़ने वाली भाषा हिंदी होती है। यहां तक नेपाल और भूटान जैसे पड़ोसी देशों से भी काफी संख्या में लोगों का आना-जाना होता है तथा लोग हिंदी में ही आपस में संवाद करते हैं।
ऐसे में उत्तर बंगाल के लिए हिंदी एक अत्यंत महत्वपूर्ण व अनिवार्य भाषा है। ऐसी स्थिति में हिंदी के विकास के प्रति चिंता एवं इसका समाधान भी एक ठोस कदम है। हिंदी भाषा में शिक्षा तथा रोजगार में गति लाने के लिए हिंदी पर ध्यान देना आवश्यक पक्ष था।
उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय, मानव विकास केंद्र की उप-निदेशक व हिंदी विभाग की प्रोफेसर डॉ मनीषा झा का कहना है कि उत्तर बंगाल के संदर्भ में अगर गौर किया जाए, तो पिछले कुछ वर्षो में हिंदी की दशा व दिशा में काफी सुधार हुआ है। हिंदी के दशा व दिशा में सुधार की पहल शुरू हो गई है, जो अत्यंत खुशी की बात है। उत्तर बंगाल के विद्यार्थी अपनी न सिर्फ स्कूली पढ़ाई हिंदी भाषा में कर रहे हैं, बल्कि कॉलेजों में भी सफलतापूर्वक हिंदी में पढ़ाई करते हुए सफलता अर्जित कर रहे हैं।
हिंदी माध्यम में विद्यार्थी अन्य विषयों की भी पढ़ाई कर सकें, इसके लिए दो वर्ष पहले बानरहाट में हिंदी माध्यम के कॉलेज खोले गऐ, जो सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। वहीं नक्सलबाड़ी के निकट एक और हिंदी माध्यम के कॉलेज का निर्माण कार्य चल रहा है। हालांकि हिंदी विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए और हिंदी कॉलेज की आवश्यकता है। विद्यार्थियों की काफी दिनों से हिंदी में प्रश्न पत्र जारी करने के लिए की जा रही मांग के मद्देनजर वह भी पूरी हो गई है।
डॉ झा ने बताया कि एनबीयू में हिंदी में एमए की नियमित पढ़ाई व हिंदी में पीएचडी की व्यवस्था है। यहां देश भर से हिंदी के विद्वान एनबीयू के हिंदी विभाग को गौरवान्वित कर चुके हैं, जो अपने अध्यापन व साहित्य लेखन के लिए देश भर में जाने जाते हैं। एनबीयू के अलावा कूचबिहार पंचानन वर्मा विश्वविद्यालय में भी हिंदी विभाग खुला है, जहां हिंदी में एमए की पढ़ाई की व्यवस्था है। उत्तर बंगाल में शिक्षा दीक्षा में हिंदी का विस्तार लोगों के लिए गर्व की बात है। यहां हिंदी के साहित्यकार अपने लेखन के लिए लोकप्रिय हैं। अब नई पीढ़ी हिंदी के विस्तार के लिए तैयार हो चुकी है।
हालांकि जहां एक ओर हिंदी का विकास शुरू हो चुका है, वहीं कुछ समस्याएं भी हैं, जिन्हें पूरा करना अभी बाकी है। उत्तर बंगाल में हिंदी में बीएड की व्यवस्था नहीं है, जो नई पीढ़ी के शिक्षार्थियों के लिए काफी परेशानी की बात है। उन्हें बीएड. के लिए बाहर जाना पड़ता है। उत्तर बंगाल में जिस अनुपात में हिंदी के विद्यार्थी हैं, उस हिसाब से कॉलेजों व विद्यालयों में हिंदी शिक्षकों की कमी हैं। शिक्षकों की संख्या बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि यह उम्मीद की जानी चाहिए कि जिस तरह से हिंदी का विकास हो रहा है, उसे देखकर लगता है कि ये समस्याएं भी जल्द खत्म हो जाएंगी।
हालांकि हिंदी के विस्तार व विकास पर समाज के अन्य वर्गो का कहना है कि शिक्षण संस्थानों के छोड़कर राज्य सरकार के अधीन आने वाले अन्य विभागों में हिंदी के प्रति लोगों में काफी उदासीनता है। इसे भी दूर करने की जरूरत है।
