-तीन बीघा कॉरिडोर को अंतरराष्ट्रीय मानक का पर्यटन केंद्र बनाने की उठी मांग

-1998 में जिलाधिकारी इंदिवर पांडेय ने सौंदर्यीकरण परियोजना के लिए किया था शिलान्यास

-बांग्लोदश के नागरिकों की सुविधा के लिए 1992 में शुरू किया तीन बीघा कॉरिडोर

गौतम सरकार, चेंगड़ाबांधा : ठंड ने अभी दस्तक नहीं दी है। फिर भी कूचबिहार जिला के भारत-बांग्लादेश का सीमावर्ती क्षेत्र तीन बीघा कॉरिडोर का प्राकृतिक सौंदर्य इतना सुहाना है कि पर्यटक यहां खिंचे चले आते है। इस लिए इसे अंतरराष्ट्रीय मानक का पर्यटन केंद्र बनाने की मांग की गयी है। यदि इस क्षेत्र के बुनियादी संरचना का विकास किया जाए, तो इलाके का आर्थिक विकास होगा। सीमावर्ती लोगों के जीवन स्तर सुधरेगा।

तीन बीघा कॉरिडोर के संबंध में जलपाईगुड़ी लोकसभा केंद्र के सांसद डॉ. जयंत कुमार राय ने बताया कि कूचलीबाड़ी स्थित तीन बीघा सीमांत इलाके को पर्यटन केंद्र तथा उसके सौंदर्यीकरण के लिए शुरू से मांग उठ रही है। हमें इस मांग को पूरा करने का प्रयास करेंगे। गौरतलब है कि 26 जून, 1992 को बांग्लोदश के नागरिकों की सुविधा के लिए तीन बीघा कॉरिडोर भारत सरकार ने खोल दिया। इसके दोनों ओर बांग्लादेश और बीच में भारतीय भूखंड 'तीन बीघा कॉरिडोर' के रूप में विख्यात है। यहां बीएसएफ जवानों का कड़ा पहरा रहता है। यहां से बांग्लादेश के जीवन शैली, रहन सहन आदि को देखा जा सकता है। दिन प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। बाहर से भी लोग यहां आते है। इसे इलाके का विकास के लिए 10 नवबंर 1998 में कूचबिहार के तत्कालीन जिलाधिकारी इंदिवर पांडेय ने सौंदर्यीकरण परियोजना के लिए शिलान्यास किया था। यहां बैठने की पूरी व्यवस्था की गई है।

कैप्शन : तीन बीघा कॉरिडोर

Posted By: Jagran

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