जागरण संवाददाता, दुर्गापुर : वेतन समझौता को लेकर केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने हड़ताल की तैयारी शुरु कर दी है। तीस जून को हड़ताल का आह्वान किया गया है। इस बार केंद्रीय श्रमिक संगठन हड़ताल में शामिल तो होंगे। वहीं हमेशा हड़ताल का विरोध करने वाली तृणमूल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आइएनटीटीयूसी) भी इस हड़ताल में शामिल होगी। सोमवार को भारतीय मजदूर संघ को छोड़कर सभी श्रमिक संगठनों ने इस्पात संयंत्र (डीएसपी) के कार्यपाल निदेशक व‌र्क्स को हड़ताल का नोटिस दिया। बीएमएस की ओर से मंगलवार को नोटिस दिया जाएगा।

दुर्गापुर इस्पात संयंत्र में वेतन समझौता 2017 से लंबित है। वेतन समझौता पिछले तकरीबन साढ़े चार साल से लंबित है। वर्ष 2017 में वेतन समझौता को लेकर बैठक होने की बात थी, लेकिन हुआ नहीं। पिछले कुछ माह से वेतन समझौता की प्रक्रिया शुरू हुई है। अब तक प्रत्येक पांच साल में सेल में वेतन समझौता की परंपरा रही है। लेकिन पिछले 31 मार्च को बैठक में सेल प्रबंधन ने 10 वर्ष के लिए वेतन समझौता का प्रस्ताव दिया। लेकिन श्रमिक संगठन उसे मानने को तैयार नहीं हुए। श्रमिकों के वेतन, पेंशन समेत अन्य मांगों को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी। जिसके बाद सभी केंद्रीय मजदूर संगठनों की ओर से खुद के स्तर पर आंदोलन किया गया। छह मई को केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने सेल में हड़ताल का आह्वान किया था, जो कोरोना महामारी के कारण टल गया। अब केंद्रीय संगठनों ने आपस में बातचीत कर 30 जून को हड़ताल का आह्वान किया है। जिसके लिए सोमवार को डीएसपी के कार्यपालक निदेशक को नोटिस सौंपा गया। जिसमें सीटू, तृणमूल ट्रेड यूनियन, इंटक, एटक, एचएमएस, एआइयूटीयूसी के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सीटू के राज्य कमेटी के सचिव विश्वरूप बनर्जी ने कहा कि सम्मानजनक वेतन समझौता की मांग हमेशा की गई, लेकिन प्रबंधन टाल-बहाना कर रहा है। इस कारण तीस जून को चौबीस घंटे की हड़ताल होगी। बीएमएस के ऑल इंडिया स्टील फेडरेशन के उपाध्यक्ष अरूप राय ने कहा कि हमारी लड़ाई सेल प्रबंधन के खिलाफ है। पहले हड़ताल होनी थी, लेकिन महामारी के कारण समय बढ़ाया गया, अब तीस जून को हड़ताल होगी। वहीं हड़ताल में पहली बार तृणमूल ट्रेड यूनियन शामिल हो रही है। तृणमूल के जिलाध्यक्ष सह दुर्गापुर स्टील प्लांट मजदूर यूनियन के महासचिव अपूर्व मुखर्जी ने कहा कि हमलोग हमेशा हड़ताल के खिलाफ रहे है। लेकिन इस्पात श्रमिकों के हक एवं सेल प्रबंधन के अडिग रवैये के खिलाफ बंद के रास्ते पर जाना पड़ रहा है।

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