जागरण संवाददाता, दुर्गापुर : दुर्गापुर शहर में बिना कागजात की जांच के मकान को किराए पर लोग दे रहे है, ऐसे में कभी भी अप्रिय घटना हो सकती है, या सुरक्षा को लेकर समस्या हो सकती है। कोई घटना होने पर मकान मालिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कोलकाता के न्यूटाउन थाना इलाके में दो दिन पहले दो अपराधियों के एनकाउंटर की घटना के बाद अब शहर के लोगों ने भी किराएदारों के कागजात की जांच की मांग उठाई है। हालांकि दुर्गापुर पुलिस भी इस दिशा में थोड़ी नरम है।

दुर्गापुर शहर की पहचान औद्योगिक शहर के रूप में है। जहां विभिन्न कल-कारखानों व संस्थाओं में काम करने वाले लोग रहते है। अब दुर्गापुर शिक्षा, चिकित्सा नगरी के रूप में भी विकसित हुआ। कॉलेज, अस्पताल के साथ मॉल, मल्टीप्लेक्स, होटल व कई निजी संस्थान का आगमन हुआ है। जिसके कर्मी किराए के मकान में रहते है। हजारों लोग किराया के घर में रहते है। मकान किराया पर देने के समय मकान मालिक पहचान पत्र लेकर किराए पर दे देते है, उस पहचान पत्र की जांच भी नहीं होती। कई बार बातचीत के आधार पर भी किराया पर घर दे देते है। शहर के सिटी सेंटर, विधान नगर इलाके में वृद्ध लोग घरों में रहते है, उनके बच्चे अन्य जगह रहते है। वे परिचय पत्र लेकर किराया देते है, लेकिन जांच नहीं कर पाते है। कई बार वे लोग बिचौलिए के माध्यम से भी मकान किराया पर देते है, बिचौलिए कमीशन लेकर गायब रहते है। लेकिन वर्तमान समय में नया कारखाना शहर में लगा नहीं है, पुराने कारखानों की हालत खराब है। ऐसे में कई मकान खाली भी है। इस कारण कई बार लोग ज्यादा कड़ाई भी नहीं करते है, अन्यथा किराएदार अन्य के घरों में जा सकते है। श्यामल राय, वंशीबदन मंडल आदि का कहना है कि खुद परेशानी से बचने के लिए हर किसी को किराएदार के कागजात का जांच करना चाहिए। पुलिस को उसकी जानकारी देनी चाहिए। वहीं पुलिस की ओर से वर्ष 2012-15 के बीच थोड़ी कड़ाई की गई थी। शहर में अपराध की घटना होने पर किराएदार का परिचय पत्र व फार्म भरकर थाने में जमा करवाया जा रहा था। पुलिस की ओर से माइकिग कर प्रचार भी किया गया था। उस समय मकान मालिक भी थोड़े तत्पर हुए थे। लेकिन पिछले कुछ साल से पुलिस की सख्ती भी बंद है। लोगों का कहना है कि पुलिस को भी थोड़ी सख्ती के साथ इस ओर ध्यान देना चाहिए।

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