जागरण संवाददाता, दुर्गापुर : विधानसभा चुनाव के पहले पिछले वर्ष दिसंबर में ब‌र्द्धमान पूर्व के सांसद सुनील मंडल के कांकसा स्थित आवास पर ही उस समय तृणमूल से नाराज चल रहे विधायकों की बैठक हुई थी। जिसके कुछ दिन बाद ही मेदिनीपुर में भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के मंच पर सुवेंदु के साथ सुनील मंडल पहुंचे थे। विधानसभा चुनाव में तृणमूल को बड़ी जीत मिलने के बाद एक बार फिर सुनील भाजपा के खिलाफ बयानबाजी शुरु कर दी थी, तब से फिर से उन्हें तृणमूल में आने की संभावना चल रही थी। उस समय भी उनके घर के पास पोस्टर लगा था। सोमवार को दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस सांसदों की ओर से पैगासस मुद्दे पर आंदोलन किया गया। उस आंदोलन में भी सुनील मंडल शामिल हुए। उस समय मीडिया से कहा था कि वे तृणमूल में है एवं तृणमूल में ही रहेंगे। जिसके बाद रात के समय उनके घर के सामने तृणमूल के नाम पर पोस्टर लगा दिया गया।

मंगलवार को इसकी जानकारी मिली। सांसद ने कहा कि मैं भाजपा की सदस्यता नहीं लिया था, अमित शाह केंद्रीय मंत्री है उनसे मैं मुलाकात कर ही सकता हूं। इसका मतलब यह नहीं कि मैं भाजपा में जा रहा हूं। कुछ दिनों पहले वे मुकुल राय के दिल्ली आवास में जाकर उनसे मिले थे। अब तृणमूल के आंदोलन में शामिल हुए। अब उनके घर के पास पोस्टर लगा है, जिसमें लिखा है, गद्दार सुनील मंडल के घर पर ही सुवेंदु-जितेंद्र जैसे गद्दार व बेइमान नेता को भाजपा में शामिल करवाने का मास्टर प्लान बना, जिसे हमलोग नहीं भूले है। एक तृणमूल कार्यकर्ता ने कहा कि सांसद के घर पर ही बैठक कर सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने की साजिश की थी। अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए इन लोगों ने भाजपा का दामन थामा था। अब वे फिर से पार्टी में आना चाह रहे है, ऐसे लोगों को पार्टी में नहीं लेना चाहिए। कांकसा के तृणमूल ब्लाक अध्यक्ष देवदास बक्शी ने कहा कि सुनील मंडल फारवार्ड ब्लाक से तृणमूल में आए थे। तृणमूल से विधायक एवं सांसद बने। वे पार्टी के खिलाफ काफी बयानबाजी कर भाजपा में शामिल हुए थे। पार्टी के कार्यकर्ताओं में आक्रोश है, वे लोग ही ऐसा पोस्टर लगा सकते है। सांसद सुनील मंडल ने कहा कि फिर से पोस्टर लगने की जानकारी नहीं है। मैं तो कांकसा में राजनीति नहीं करता, मेरा कार्य क्षेत्र पूर्व ब‌र्द्धमान है। किसी ने गुस्से में पोस्टर लगाया होगा। भाजपा के जिला संयोजक शिवराम बर्मन ने कहा कि राजनीति का प्रधान लक्ष्य मनुष्य की सेवा होती है। कुछ लोग क्षमता दखल रखना चाहते है।

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