हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का अत्यधिक महत्व होता है। यह व्रत हर महीने में 2 बार रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।
गुरुवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष व्रत कहते हैं। यह व्रत करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
इस बार गुरु प्रदोष व्रत 18 जुलाई को मनाया जा रहा है। इसका शुभ मुहूर्त 18 जुलाई को शाम 8 बजकर 44 मिनट पर शुरू होकर 19 जुलाई को शाम 7 बजकर 41 मिनट तक है।
प्रदोष व्रत के दिन शिव जी की पूजा प्रदोष काल में होती है। इस दिन प्रदोष काल शाम 8 बजकर 44 मिनट से शुरू होकर 9 बजकर 22 मिनट तक है।
गुरु प्रदोष व्रत का पालन करने से भक्तों की मनचाही मुराद पूरी होती है और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। इसके साथ ही सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
प्रदोष व्रत के दिन व्रत का पालन करने से शत्रुुओं से छुटकारा मिलता है। इसके साथ ही जीवन में तरक्की के योग बनते हैं।
गुरु प्रदोष व्रत के दिन ब्रह्मा योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही रवि और शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है। इस योग में पूजा करने से बहुत लाभ मिलते हैं।
वहीं, विवाहित महिलाएं सौभाग्य में वृद्धि के लिए गुरु प्रदोष व्रत का पालन करते हैं। प्रदोष व्रत का पालन करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।
गुरु प्रदोष व्रत का पालन करने से जीवन में खुशहाली आती है। धर्म और अध्यात्म से जुड़ी ऐसी ही अन्य खबरों के लिए पढ़ते रहें JAGRAN.COM