मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसके बारे में लोगों को जागरूक करने के मकसद से हर साल 17 नवंबर को नेशनल एपीलेप्सी डे मनाया जाता है।
उत्तानासन सरल और काफी फायदेमंद आसन है। इस आसन को करने से कंधों से लेकर हिप्स और काफ मसल्स की अच्छी-खासी स्ट्रेचिंग हो जाती है। मसल्स की स्ट्रेचिंग से स्ट्रेस दूर होता है।
हलासन के अभ्यास नसों और मसल्स की अकड़न दूर होती है और टेंशन रिलीज होता है। यह नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करने का काम करता है जो मिर्गी के मरीजों के लिए बहुत जरूरी है।
शवासन का अभ्यास पूरी तरह से माइंड को रिलैक्स करने का काम करता है। सेंट्रल नर्वस सिस्टम को शांत करता है। जिससे स्ट्रेस और एंजाइटी की समस्या दूर रहती है।
बालासन भी आसान लेकिन मिर्गी के मरीजों को लिए बेहद फायदेमंद आसान है क्योंकि दिमाग को शांत रखता है और सेन्ट्रल नर्वस सिस्टम की कार्य क्षमता में सुधार करता है।
मत्स्यासन के अभ्यास से मस्तिष्क के कार्य करने की क्षमता सुधार होता है। स्ट्रेस दूर होता है दिमाग शांत और खुश रहता है। अपर बॉडी की अच्छी स्ट्रेचिंग हो जाती है। मसल्स टेंशन रिलीज होता है।