कुछ लोगों के घरों में ईशान दिशा में शौचालय बना दिया जाता है, यह एक बहुत ही बड़ा वास्तु दोष होता है। इसके चलते जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
ईशान में शौचालय के निर्माण से दिशा ही नहीं अशुद्ध होती है बल्कि उस घर में आने वाले शुभ प्रभाव भी न्यूनतम होते जाते हैं।
ईशान की अशुभता से भवन के दूसरे घटक भी बेहद बुरी तरह प्रभावित होते हैं। ईशान में शौचालय के निर्माण से इस स्थान पर जल अशुद्ध या दूषित बना रहता है।
जल के दूषित हो\ने से चंद्रमा अशुभ प्रभावों में जाकर पीड़ित हो जाता है। यह अवस्था चंद्रग्रहण और चंद्रमा के नीच प्रभाव में आने के समान ही अशुभ रहती है।
जिसका विपरीत असर उस भवन में रहने वालों के मन पर पड़ता है। मन सदैव बुरे विचारों और व्यर्थ की शंकाओं से घिरा रहता है।
ईशान अर्थात उत्तर पूर्व एक बहुत ही शुभ दिशा होती है. इस दिशा में निर्माण कार्य करने में शुभता का खास ध्यान रखना चाहिए।
इस स्थान पर पूजा कक्ष का निर्माण करना सबसे उत्तम रहता है। इस स्थान पर जल का भंडारण करना भी शुभ फल देने वाला रहता है।
जिस घर में ईशान कोण की तरफ पूजा कक्ष या जल भंडारण का स्थान रहता है वह भवन सदैव शुभ प्रभावों में तो रहता ही है, साथ ही उस पर देव कृपा भी होती है।
अध्यात्म से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहें jagran.com