सनातन धर्म में प्रदोष व्रत पर पूजा-पाठ करने का विधान होता है। ऐसा करने से जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं। आइए जानते हैं कि प्रदोष व्रत पर किन मंत्रों का जप करना चाहिए?
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास का दूसरा प्रदोष व्रत 13 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 13 नवंबर को दोपहर 01 बजकर 13 मिनट होगी। वहीं, इसका समापन 14 नवंबर को सुबह 09 बजकर 43 मिनट पर होगा।
प्रदोष व्रत के दौरान मंत्र का जप करना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा करने से व्यक्ति जीवन में तरक्की करता है और धन लाभ के योग भी बनते हैं।
प्रदोष व्रत पर पूजा करते समय ॐ नमः शिवाय: मंत्र का जप करना चाहिए। इससे साधक की मनोकामना पूरी होने लगती है और मन भी शांत रहता है।
प्रदोष व्रत पर ॐ गौरीशंकरार्धनाथ्री नमः मंत्र का जप करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है। इसके अलावा, विवाह के योग बनते हैं।
शिव जी की पूजा करते समय ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् मंत्र का जप करने से कार्य में सफलता मिलती है। इसके साथ ही, व्यक्ति जीवन में तरक्की करता है।
प्रदोष व्रत पर इन मंत्रों का जप करने से साधक की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इसके अलावा, व्यापार में आ रही बाधा दूर होने लगती है।
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