चंपारण सत्याग्रह के सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में बिहार सरकार की तरफ से चलाए गए कार्यक्रम का समापन करने पीएम मोदी मोतिहारी पहुंचे और सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह कार्यक्रम के तहत लोगों से स्वच्छता को अपने जीवन में उतारने की अपील की। लेकिन जमीनी हकीकत इससे हटकर है। आंकड़े बताते हैं कि शौचालय बनाने में बिहार सबसे निचले पायदान पर है। पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक बिहार के 54.70 प्रतिशत ग्रामीण परिवार अभी भी घर में शौचालय की सुविधा से दूर हैं। इसके अलावा उड़ीसा के 49.51 प्रतिशत और यूपी के 41.32 प्रतिशत ग्रामीण परिवार घर में शौचालय की सुविधा से दूर हैं। स्वच्छ भारत अभियान के तहत चल रहे प्रयासों के फलस्वरूप 80 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को घर में ही शौचालय की सुविधा मुहैया करा दी गयी है। पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस साल 26 मार्च तक देश में कुल 16.22 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 12.91 करोड़ परिवारों को इस सुविधा से जोड़ दिया गया है। जबकि गुजरात, हिमाचल प्रदेश और केरल सहित 13 राज्यों के शत प्रतिशत ग्रामीण इलाके खुले में शौच की समस्या से मुक्त होने का सरकार के आंकड़ों में दावा किया गया है।