मुख्यमंत्री के रूप में एक साल पूरा कर चुके योगी आदित्यनाथ पूरे दावे के साथ कहते हैं कि सरकार ने उत्तर प्रदेश के प्रति धारणाएं बदली हैं। सरकार के एक साल पूरे होने पर योगी ने दैनिक जागरण के संपादक मंडल से लंबी बातचीत की...योगी आदित्यनाथ ने इंसेफ्लाइटिस किसी एक जिले की समस्या नहीं है..उन्होंने कहा कि मैंने इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर संसद तक सर्वाधिक संघर्ष किया है। यह सिर्फ गोरखपुर की ही नहीं प्रदेश के 38 जिलों की समस्या है। इसमें गोरखपुर और बस्ती मंडल के जिलों के अलावा बिहार और नेपाल के तराई के क्षेत्र भी शामिल हैं। वस्तुत: यह बीमारी 1974 से है। 2005 तक यह जापानी इंसेफ्लाइटिस के रूप में थी। इसकी मुख्य वजह म'छर थे। इसके प्रभावी नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण था। वह भी तब जब यह फरवरी में लगने लगें। टीकों के लगने के करीब तीन-चार माह जिसे लगते थे उनमें रोग के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है। उस समय की सरकारों के पास न पर्याप्त टीके थे न टीकों के रखरखाव के लिए बुनियादी सुविधाएं। इसके लिए उन लोगों ने कभी गंभीर प्रयास भी नहीं किये। काफी प्रयास के बाद एक-आध बार टीकाकरण हुआ तो नतीजे अ'छे आये। 2005 के बाद बीमारी ने स्वरूप बदल दिया। अब इसकी वजह एइएस (एक्वार्ड इम्यून सिंड्रोम) नामक विषाणु हैं। यह गंदगी और प्रदूषित पानी में पनपता है। इसके प्रभावी नियंत्रण का तरीका प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पानी की उपलब्धता और साफ-सफाई ही है। प्रधानमंत्री की अगुआई में चल रहे स्व'छ भारत मिशन की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।