देश में बाघ संरक्षण की दिशा में चल रहे प्रयासों में तेजी आई है और बाघों की तादाद भी बढ़ी है। बावजूद इसके तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। शिकारियों की कुदृष्टि बाघों पर गड़ी हुई है। पिछले 10 सालों के आंकड़े तस्दीक करते हैं कि देश में हर साल औसतन 31 बाघों का शिकार हो रहा है। यही चिंता का बड़ा कारण भी है। हालांकि, इसे देखते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने उत्तराखंड समेत उन सभी 18 राज्यों को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं, जहां बाघों का संरक्षण हो रहा है। देश में में बाघों की संख्या 1706 थी, जो में बढ़कर 2226 हो गई। यह आंकड़ा बाघ संरक्षण के प्रति संजीदगी को दर्शाता है, लेकिन शिकारियों पर नकेल कसने की दिशा में अभी तक ठोस पहल नहीं हो पाई है। वह भी तब जबकि कुख्यात शिकारी गिरोहों द्वारा विभिन्न राज्यों में एक के बाद एक बाघों के शिकार की घटनाएं सुर्खियां बन रही हैं।