गुलाबी नोट अब 'काला धन' होने लगा है। तमाम बैंक शाखाओं और करेंसी चेस्ट में आने वाली रकम में  2000 रुपये के नोटों की लगातार गिरती संख्या इसका प्रमाण है। मार्च 2018 में बैंकों की करेंसी चेस्ट की बैलेंस शीट की रिपोर्ट के अनुसार बैंकों में दो हजार रुपये के नोटों की संख्या कुल रकम का औसतन दस फीसद ही है। यह स्थिति तब है जब भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार कुल जारी करेंसी में 2000 रुपये के नोटों का हिस्सा 50 फीसद से अधिक है। आरबीआइ ने नोटबंदी के बाद कुल करीब सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के दो हजार रुपये के नोट जारी किये थे। जुलाई तक बैंकों में कैश की आवक में दो हजार रुपये के नोटों की संख्या करीब 35 फीसद रहती थी। नवंबर 2017 तक घटकर यह करीब 25 फीसद रह गई। कानपुर के कुछ बड़े बैंकों की बड़ी करेंसी चेस्ट की रिपोर्ट और भी भयावह स्थिति पेश कर रही है। भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया जैसे बैंकों के करेंसी चेस्ट के आंकड़ों में 2000 रुपये के नोट की संख्या 9 से 14 फीसद तक ही है।