देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु जल्द ही प्राचीन पारंपरिक मार्ग से होते हुए भी माता वैष्णो देवी के दरबार तक पहुंच सकेंगे। नगरोटा से कटड़ा तक 25 किमी लंबे इस रास्ते में अनेक प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, जिनके दर्शन का लाभ श्रद्धालु उठा सकेंगे। मान्यता है कि इन मंदिरों का दर्शन किए बिना मां वैष्णो देवी की यात्रा अधूरी रहती है। यह रूट देश के विभाजन के बाद से बंद है। अब राज्य सरकार इसे पुन: शुरू करने जा रही है। मार्ग पर कई प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हुआ करते थे। इनमें मां वैष्णो देवी मंदिर पंगोली, ठंडा पानी, शिव शक्ति मंदिर मढ़-द्रावी, राजा मंडलीक मंदिर, काली माता मंदिर गुण्डला, प्राचीन शिव मंदिर बम्याल, ओली मंदिर बम्याल, देवा माई शामिल हैं। मान्यता के अनुसार जम्मू से करीब आठ किमी दूर नगरोटा स्थित कोल कंडोली देवी मंदिर में प्रथम दर्शन कर ही दुर्गम यात्रा की शुरुआत की जाती थी।