वसंत विहार में निर्भया कांड के बाद दिल्ली में दुष्कर्म की वारदातों को रोकने के लिए तमाम दावे और उपाय किए गए थे। बावजूद इसके, राजधानी इस दंश से मुक्त नहीं हो पाई है। 2012 के निर्भया कांड के पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन ऐसी वारदातें घटने के बजाय करीब तीन गुना बढ़ गई हैं। तस्वीर का एक पहलू यह भी है कि पिछले तीन साल में इन वारदातों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। उदाहरण के तौर पर 2016 के मुकाबले 2017 में दुष्कर्म की वारदातों में महज 0.7 फीसद की ही गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में दुष्कर्म की वारदातों पर अंकुश बेशक न लग पाया हो, छेड़छाड़-छींटाकशी के मामले घटे हैं। 2016 की तुलना में 2017 में छेड़छाड़ में 19 फीसद तो छींटाकशी में 30 फीसद कमी आई है। 2016 में छेड़छाड़ के 403 के मुकाबले 2017 में 3273 मामले दर्ज किए गए। इसी प्रकार छींटाकशी की घटनाएं भी 2016 के 894 के मुकाबले 2017 में 621 रह गईं।